नईदुनिया प्रतिनिधि। बिलासपुर। कारपोरेट दवा कंपनियों की मनमानी और अवैध ई-फार्मेसी के खिलाफ बिलासपुर के दवा व्यवसायियों ने आर-पार की लड़ाई का मोर्चा खोल दिया है। आल इंडिया आर्गेनाइजेशन आफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के देशव्यापी आह्वान पर जिला औषधि विक्रेता संघ शाखा बिलासपुर बुधवार 20 मई को जिले की सभी दवा दुकानें और थोक एजेंसियां बंद रखेगा।
इस हड़ताल के कारण बिलासपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है, हालांकि आपातकालीन सेवाओं के लिए कुछ चुनिंदा दुकानों को छूट दी गई है। लेकिन इसके बाद भी 1500 से अधिक मेडिकल स्टोर्स और दवा एजेंसियां बंद रहेगी।जिला औषधि विक्रेता संघ के अध्यक्ष व प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि यह आंदोलन केंद्र सरकार की नीतियों और आनलाइन व्यापार के कारण आजीविका खो रहे लाखों परिवारों के हक में है।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर आर-पार की जंग
दवा विक्रेताओं का कहना है कि सरकार द्वारा दवा व्यवसाय को लेकर जो नए नियम थोपे जा रहे हैं, वे छोटे और स्थानीय व्यापारियों को बर्बाद कर देंगे। संगठन मुख्य रूप से तीन मांगों को लेकर अड़ा हुआ है। जीएसआ 20 का विरोध है, क्योंकि इसके तहत दवा व्यापार पर कड़े और अव्यावहारिक नियम लागू किए जा रहे हैं। जीएसआर 817 पर रोक लगाने की मांग है, इस संशोधन से बड़े कारपोरेट घरानों को दवा बाजार पर एकाधिकार स्थापित करने का मौका मिल रहा है। इसी तरह आनलाइन दवा बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध होना चाहिए। इंटरनेट के माध्यम से बिना किसी भौतिक नियंत्रण के बेची जा रही दवाओं पर तुरंत रोक लगाई जाए।
एआई से बन रहे फर्जी प्रिस्क्रिप्शन, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़
प्रेसवार्ता में राकेश शर्मा ने एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोविड काल में जिस आनलाइन दवा व्यवस्था को अस्थाई मंजूरी दी गई थी, अब उसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। ई-फार्मेसी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर फर्जी डाक्टरों के नाम और फर्जी पर्चियां (प्रिस्क्रिप्शन) तैयार कर रही हैं। इन फर्जी पर्चियों के आधार पर बिना किसी उचित सत्यापन (वेरिफिकेशन) के युवाओं को नारकोटिक्स और साइकोट्रोपिक (नशीली और अवसादरोधी) दवाइयां घर बैठे डिलीवर की जा रही हैं, जो समाज और युवा पीढ़ी के लिए बेहद घातक है।
फार्मासिस्ट की जगह नहीं ले सकता कंप्यूटर
राकेश शर्मा का यह भी कहना है कि स्थानीय मेडिकल स्टोर्स पर तैनात फार्मासिस्ट मरीज को दवा देने के साथ-साथ उसकी सही खुराक (डोज), एक्सपायरी और उपयोग के तरीकों के बारे में सीधे मार्गदर्शन देते हैं। आनलाइन व्यवस्था में केवल डिब्बा थमा दिया जाता है, कोई काउंसिलिंग नहीं होती। महामारी और आपदा के समय हमेशा स्थानीय केमिस्ट ने ही अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की सेवा की है, कारपोरेट कंपनियों ने नहीं।
अस्पतालों के मेडीकल स्टोर खूले रहेंगे
इस हड़ताल से अस्पतालों के मेडीकल स्ओर को दूर रखा गया है, क्योंकि यहां रोजाना ओपीडी चलती है, मरीज का इलाज किया जाता है और अस्पतालों के मेडीकल स्टोर से उनके लिए दवा उपलब्ध कराई जाती है, यदि यहां के मेडीकल स्टोर को बंद कर दिया जाएगा तो मरीजों को दवा नहीं मिल पाएगा, जिससे स्थिति बिगड़ सकती है, इन बातों को ध्यान में रखते हुए अस्पतालें के मेडीकल स्टोर को हड़ताल के दायरे से दूर रखा गया है।
फैक्ट फाइल
– जिले भर में 1500 से ज्यादा रिटेल मेडिकल स्टोर्स और होलसेल एजेंसियां।
– आल इंडिया आर्गेनाइजेशन आफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स का आयोजन।
– ई-फार्मेसी, कारपोरेट एकाधिकार, जीएसआ 220 और जीएसआर 817 नियम का किया जा रहा है विरोध।
– मांगें पूरी न होने पर दवा विक्रेता संघ द्वारा आने वाले दिनों में अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की चेतावनी।
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