छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर ने ग्रीष्मकालीन अवकाश 2026 के दौरान सुचारू न्यायिक कामकाज और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए एक बड़ा और हाईटेक …और पढ़ें

HighLights
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट का फैसला।
- वकीलों को फिजिकल कोर्ट की भी रहेगी छूट।
- कोर्ट स्टाफ के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में जारी सर्कुलर के मद्देनजर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सुचारू न्यायिक कामकाज और सरकारी संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक उपायों की शुरुआत की है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के मार्गदर्शन में इस संबंध में विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रशासन द्वारा जारी सर्कुलर नंबर 143 एमआइएस के तहत ग्रीष्मकालीन अवकाश 2026 के लिए विशेष प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, ताकि न्याय की प्रक्रिया भी बाधित न हो और संसाधनों की भी बचत की जा सके। अवकाश अवधि के दौरान अनावश्यक आवाजाही को कम करने और अदालती कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए उच्च न्यायालय में मामलों की सुनवाई आमतौर पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। हालांकि, जो अधिवक्ता अपरिहार्य कारणों से वर्चुअल मोड में शामिल नहीं हो सकते, वे भौतिक रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हो सकते हैं। इसके साथ ही न्यायालय भी जहां उचित समझे, मामलों की सुनवाई फिजिकल मोड में करने का निर्देश दे सकते हैं।
अदालती कर्मचारियों को मिलेगा वर्क फ्राम होम का विकल्प
सर्कुलर के अनुसार, उच्च न्यायालय और जिला न्यायपालिका के कर्मचारियों को सप्ताह में अधिकतम दो दिन वर्क फ्राम होम की सुविधा दी जा सकती है। इसके लिए रोस्टर इस तरह तय होगा कि कार्यालयीन कामकाज में कोई बाधा न आए और कम से कम 50 प्रतिशत स्टाफ हर दिन कार्यालय में मौजूद रहे। घर से काम करने वाले कर्मचारियों को टेलीफोन और अन्य आधिकारिक माध्यमों पर हर समय उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा।
ईंधन संरक्षण के लिए कार-पूलिंग की पहल
ईंधन की बचत और सरकारी संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए राज्य के न्यायिक अधिकारियों, हाई कोर्ट के रजिस्ट्री अधिकारियों और मंत्रालयिक कर्मचारियों के बीच वाहन पूलिंग की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को भी आपस में कार-पूलिंग व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
हाईटेक होगी रजिस्ट्री व्यवस्था
उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को इन सभी व्यवस्थाओं और वीडियो कान्फ्रेंसिंग सुविधाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी जरूरी तकनीकी व लाजिस्टिकल सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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