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हरेली तिहार: नवा रायपुर CM हाउस में पहली बार आयोजन:छत्तीसगढ़ में मंत्री और VIP भी चढ़ेंगे गेड़ी, भूपेश बघेल के निवास में भी मनेगा तिहार




छत्तीसगढ़ में 12अगस्त को हरेली का त्योहार मनाया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री निवास को पारंपरिक अंदाज में सजाया जा रहा है। नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास को ग्रामीण थीम पर सजाया जा रहा है। गांव के मेलों में लगने वाले झूलों को भी सीएम हाउस में लगाया जा रहा है। मुख्यमंत्री निवास में हरेली त्योहार मनाने के लिए पहुंचने वाले नेता और VIP भी गेड़ी चढ़ते दिखेंगे। नेता-मंत्री, विधायक पारंपरिक झूलों झूलते दिखेंगे।
लोक कलाकार देंगे छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति कार्यक्रम में स्थानीय लोक कलाकारों को भी शामिल किया जाएगा। कलाकार छत्तीसगढ़ी लोकगीतों और पारंपरिक प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की संस्कृति की झलक दिखाएंगे। मुख्यमंत्री निवास को भी इसी थीम के मुताबिक सजाया जा रहा है। भूपेश बघेल के रायपुर निवास में भी मनेगा हरेली हरेली पर्व के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल के रायपुर स्थित निवास में भी बुधवार को दोपहर 12 बजे हरेली तिहार का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में कांग्रेस के कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति और पारंपरिक अंदाज की झलक देखने को मिलेगी। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री निवास पर हरेली तिहार को बड़े स्तर पर मनाने की परंपरा की शुरुआत भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में हुई थी। क्या है गेड़ी? इसे बांस से बनाई जाता है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांधकर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है। इसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। दरवाजे पर नीम की डाली गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत और बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली लगाते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। हरेली पर्व के दिन पशुधन के अच्छे स्वास्थ्य के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनों में जाकर कंदमूल लाकर किसानों को वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव और ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों की ओर से चावल, दाल जैसी चीजें उपहार के रूप में दी जाती हैं ।



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