भास्कर न्यूज| रायगड़ा ओडिशा के रायगड़ा जिले में सोमवार को जेके पेपर मिल की कॉर्पोरेट मनमानी और प्रशासन की चुप्पी ने हजारों आदिवासियों के जीवन को संकट में डाल दिया है। मुख्यमंत्री के आदेश के एक साल बीत जाने के बावजूद मिल प्रबंधन ने नागावली नदी पर बना अपना गैर-कानूनी बांध हटाने से इनकार कर दिया है। यह न केवल सरकारी आदेश की अवहेलना है, बल्कि जल अधिकार की खुली लूट है। सालों से जेके पेपर मिल ने नदी के प्राकृतिक बहाव को रोककर उस पर एकाधिकार कर रखा है। ग्रामीणों के अनुसार इस अवैध बांध के कारण निचले इलाकों में बसे 200 से अधिक गांवों में पानी का हाहाकार मचा है। चिलचिलाती गर्मी में किसान सिंचाई के लिए तरस रहे हैं और पीने के पानी के स्रोत (ट्यूबवेल) सूख चुके हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी फैक्ट्री को निर्धारित मात्रा (40 हज़ार क्यूबिक मीटर) में पानी लेने की अनुमति होती है, लेकिन आरोप है कि जेके पेपर मिल इस सीमा को लांघकर पानी की चोरी कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कंपनी अपने गंदे पानी को रिसाइकिल क्यों नहीं कर रही। आखिर क्यों नदी को जहर बनाया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब आदिवासियों ने आवाज़ उठाई है। 20 जून 2012 को मौजूदा विधायक कद्रका अप्पालस्वामी के नेतृत्व में आदिवासियों ने इस बांध को जबरन हटा दिया था। अब एक बार फिर जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। अगले महीने मुख्यमंत्री के रायगड़ा दौरे से पहले इलाके में भारी तनाव है। आदिवासी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरेंगे। क्या राज्य सरकार का आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित है। क्या कॉर्पोरेट का मुनाफा आदिवासियों की जान से बढ़कर है। जहरीला पानी और मासूमों की जान का सौदा: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रोक के बावजूद फैक्ट्री का ज़हरीला पानी नदी को प्रदूषित कर रहा है। स्थानीय बुजुर्ग सिरिका रामू का दर्द छलक पड़ा। 66 साल से यह नदी जहरीली की जा रही है। मिल प्रबंधन ने भारी मशीनों से नदी का सीना चीरकर रास्ता बदल दिया, जिसकी वजह से दो साल पहले दो मासूम लड़कियों की मौत हो गई थी। अब गर्मी में पानी की भारी लूट से हमारे खेत और गले दोनों सूख रहे हैं।
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