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छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन साइबर शील्ड” के तहत रायपुर रेंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर ठगी और सट्टा गिरोह को फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों से 300 से अधिक एक्टिवेटेड सिम कार्ड से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई है, जिनका इस्तेमाल देशभर में साइबर फ्रॉड में किया जा रहा था। आरोपियों का नाम पुलिस द्वारा रायपुर निवासी विनोद वर्मा, सुदीप्त सासमल, बलौदा बाजार निवासी शिवनारायण साहू, दुर्ग निवासी जयंत लहरी, महावीर नगर मनीष आहूजा और जामुल निवासी कैलाश प्रताप सिंह बताया जा रहा है। विदेशों से सिम एक्टिवेट होने के मिले डिजिटल साक्ष्य आरोपियों को गिरफ्तार करने वाले विवेचना अधिकारियों के अनुसार पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तार आरोपी रायपुर, दुर्ग, बलौदा बाजार,पश्चिम बंगाल सहित विदेशों से जुड़े हुए हैं। ये आरोपी मोबाइल दुकानों के जरिए फर्जी तरीके से सिम कार्ड एक्टिवेट कर साइबर अपराधियों को बेचते थे। इन केसों की जांच करने में पकड़ाए आरोपी पुलिस के मुताबिक, थाना माना (रायपुर ग्रामीण) और आजाद चौक में दर्ज दो अलग-अलग मामलों की जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पहले मामले में 20.28 लाख रुपए और दूसरे में 6.42 लाख रुपए की साइबर ठगी सामने आई थी। इन मामलों में म्यूल बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम का इस्तेमाल किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने सिम सेवा प्रदाता कंपनियों से डेटा लेकर तकनीकी विश्लेषण किया। इसके आधार पर सिम बेचने वाले और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की गई। गिरफ्तार आरोपियों में सुदीप्त सासमल, शिवनारायण साहू, जयंत लहरी, मनीष आहूजा, सुधीर जैन, कौशल प्रताप सिंह और विनोद वर्मा शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे नए सिम लेने या पोर्ट कराने वाले ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करते थे। ई-केवाईसी के दौरान डबल थंब स्कैन और आई ब्लिंक का इस्तेमाल कर अतिरिक्त सिम एक्टिवेट किए जाते थे। वहीं, जिनके पास आधार कार्ड की कॉपी होती थी, उनके नाम पर डी-केवाईसी के जरिए सिम जारी किए जाते थे। इन कामों में होता है फर्जी सिमों का इस्तेमाल इन फर्जी सिम कार्ड को अधिक कीमत पर साइबर ठगों को बेचा जाता था। इनका उपयोग टेलीग्राम रिव्यू टास्क, ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, फेक सोशल मीडिया अकाउंट, शेयर ट्रेडिंग स्कैम और सस्ते सामान बेचने के नाम पर ठगी जैसे मामलों में किया जा रहा था। जांच की जा रही है: पुलिस विवेचना अधिकारियों के अनुसार फिलहाल पुलिस सभी सिम कार्ड और नेटवर्क का विस्तृत विश्लेषण कर रही है। आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है और मामले में आगे की जांच जारी है।
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