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छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के खर्वे गांव में सीरियल किलिंग केस ने पूरे छत्तीसगढ़ को हिला दिया है। गांव के रामसहाय जायसवाल ने तीन महीने के अंदर 8 लोगों को जहर मिली शराब पिलाकर मौत के घाट उतार दिया। आरोपी ने पूछताछ में पुरानी रंजिश, कर्ज और बदले की भावना को वजह बताया है। हालांकि, यह पहला मामला नहीं है जब छत्तीसगढ़ में किसी आरोपी ने एक के बाद एक कई हत्याओं को अंजाम दिया हो। प्रदेश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां आरोपी सालों तक पुलिस को चकमा देते रहे। किसी ने शवों को घर में दफना दिया, किसी ने हत्या के बाद उसी कब्र पर रातें बिताईं, तो किसी ने गंगाजल में जहर मिलाकर पिलाया। इस रिपोर्ट में पढ़िए छत्तीसगढ़ के 5 सबसे खौफनाक सीरियल किलर की कहानी….. छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित सीरियल किलिंग मामलों में रायपुर के कुकुरबेड़ा निवासी अरुण चंद्राकर का नाम सबसे ऊपर आता है। वर्ष 2005 से 2012 के बीच उसने अपने पिता, पत्नी, साली, मामा ससुर, मकान मालिक समेत 7 लोगों की हत्या कर दी। उसकी क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई लोगों को उसने पहले बेहोश किया और फिर जिंदा गड्ढे में दफना दिया। 6 साल तक किसी को इन हत्याओं की भनक तक नहीं लगी। पुलिस भी अलग-अलग गुमशुदगी के मामलों को जोड़ नहीं पाई। आखिरकार जनवरी 2012 में एक बच्ची की गुमशुदगी की जांच ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। चोरी की आदत ने घर से निकाला, अपराध की दुनिया में उतरा अरुण मूल रूप से दुर्ग जिले के गुंडरदेही क्षेत्र के कचांदुर गांव का रहने वाला था। बचपन से ही उसे चोरी की लत थी। परिवार ने कई बार समझाया, लेकिन आदत नहीं बदली। आखिरकार 1994 में उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद वह रेलवे स्टेशन पर रातें गुजारने लगा। छोटे-मोटे अपराध करता और जेल जाता रहा। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह 24 से ज्यादा बार जेल जा चुका था। जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात कई अपराधियों से हुई। वहीं से उसने अपराध को आसान कमाई का रास्ता मान लिया। प्यार हुआ, शादी की…फिर जायदाद के लिए पत्नी को मार डाला 2008 में अरुण ने कुकुरबेड़ा की रहने वाली लिली से लव मैरिज की। दोनों ने नया घर बसाया और साथ रहने लगे। शुरुआत में सब नॉर्मल था, लेकिन कुछ ही समय बाद अरुण की नजर पत्नी और उसके रिश्तेदारों की संपत्ति पर पड़ गई। उसने एक-एक कर अपने सबसे करीबी लोगों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। पहले विश्वास जीतता, फिर उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश करता। इसके बाद पहले से खोदे गए गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढंक देता। पुलिस के मुताबिक कई लोग उस वक्त जिंदा थे, लेकिन अरुण ने उन्हें तड़पकर मरने के लिए छोड़ दिया। पिता को चलती ट्रेन से फेंका, रिश्तेदारों को लिखता रहा चिट्ठियां अरुण ने सिर्फ जिंदा दफनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उसने अपने पिता की हत्या चलती ट्रेन से धक्का देकर की। बाद में पत्नी और अन्य मृतकों के नाम से रिश्तेदारों को चिट्ठियां लिखता रहा। चिट्ठियों में लिखा होता कि सब ठीक है, चिंता मत करना। इसी वजह से परिवार वालों को सालों तक लगा कि उनके अपने लोग कहीं बाहर रह रहे हैं। एक बच्ची की गुमशुदगी ने खोला पूरा राज जनवरी 2012 में एक बच्ची के लापता होने की जांच के दौरान पुलिस का शक अरुण पर गया। पूछताछ में वह टूट गया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने अलग-अलग जगहों से कंकाल बरामद किए। एक-एक कर सात हत्याओं का खुलासा हुआ। अदालत ने पत्नी, साली और मकान मालिक की हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पिता की हत्या के मामले में भी उसे अलग से सजा मिली। बाकी मामलों की भी सुनवाई हुई। छत्तीसगढ़ के सबसे सनसनीखेज मर्डर केसों में रायपुर के सुंदर नगर निवासी उदयन दास का नाम हमेशा लिया जाएगा। यह ऐसा मामला था, जिसने सिर्फ रायपुर या भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था। बाहर से देखने पर उदयन एक पढ़ा-लिखा, आधुनिक और अमीर युवक दिखाई देता था। फेसबुक और ऑरकुट पर उसकी प्रोफाइल देखकर लोग उसे अमेरिका में रहने वाला, संयुक्त राष्ट्र (UN) में काम करने वाला और IIT दिल्ली का पढ़ा-लिखा इंजीनियर समझते थे। लेकिन उसकी असली दुनिया चार दीवारों के भीतर दफन थी। साल 2010 में उसने अपने पिता बी.के. दास और मां इंद्राणी दास की हत्या कर दी। दोनों के शव घर के आंगन में बने सेप्टिक टैंक के नीचे दफना दिए। 6 साल बाद उसने भोपाल में अपनी लिव-इन पार्टनर आकांक्षा शर्मा की भी हत्या कर दी। प्रेमिका के शव को लोहे के बक्से में सीमेंट से भरकर कमरे के अंदर ही दफना दिया और महीनों तक उसी चबूतरे पर सोता रहा। जब इस केस का खुलासा हुआ तो पुलिस अफसर भी उसकी बेरहमी देखकर हैरान रह गए। बचपन से सामान्य जिंदगी…लेकिन सपनों की दुनिया में जीता था उदयन का परिवार पढ़ा-लिखा और संपन्न था। उसके पिता बी.के. दास भेल में फोरमैन थे, जबकि मां इंद्राणी दास सरकारी विभाग में एनालिस्ट के पद से रिटायर हुई थीं। परिवार के पास रायपुर के अलावा दूसरी जगहों पर भी संपत्ति थी। आर्थिक रूप से किसी चीज की कमी नहीं थी। उदयन ने रायपुर के स्कूल से सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की थी, लेकिन सोशल मीडिया पर वह खुद को IIT दिल्ली का छात्र बताता था। कभी कहता कि वह अमेरिका में नौकरी कर रहा है, तो कभी रूस या पेरिस में होने का दावा करता। कई बार उसने खुद को संयुक्त राष्ट्र में कार्यरत भी बताया। उसकी बनाई हुई इस झूठी दुनिया पर कई लोग यकीन भी कर लेते थे। मां-पिता से पैसों को लेकर शुरू हुआ विवाद उदयन आलीशान जिंदगी जीना चाहता था। उसे महंगी कारें, महंगे गैजेट और लग्जरी लाइफ पसंद थी। इसके लिए वह अक्सर मां से पैसे मांगता था। लेकिन मां हर बार उसे जरूरत के हिसाब से ही पैसे देती थीं और फिजूल खर्ची का विरोध करती थीं। उदयन को यह बात नागवार गुजरने लगी। उसकी मां उसे हर छोटी-बड़ी बात पर टोकती थीं। इसी बात से वह इतना नाराज हुआ कि उसने अपने ही माता-पिता को रास्ते से हटाने की योजना बना ली। एक ही घर में की दोनों की हत्या साल 2010 में उदयन ने पहले अपने पिता और फिर मां की हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने किसी को भनक तक नहीं लगने दी। घर के आंगन में सेप्टिक टैंक बनवाया और दोनों के शव उसमें दफना दिए। पड़ोसियों और रिश्तेदारों से वह कहता रहा कि उसके माता-पिता विदेश चले गए हैं और वहीं रह रहे हैं। चूंकि दोनों नौकरी से रिटायर हो चुके थे, इसलिए किसी को ज्यादा शक भी नहीं हुआ। हत्या के बाद भी उदयन का लालच खत्म नहीं हुआ। वह हर महीने बैंक जाकर माता-पिता की पेंशन निकालता रहा। उनके संयुक्त खाते का इस्तेमाल करता रहा। बाद में रायपुर का मकान भी बेच दिया। पुलिस के मुताबिक उसे संपत्ति और अन्य स्रोतों से करीब दो करोड़ रुपए मिले, जिनसे उसने लग्जरी कारें खरीदीं और महंगे शौक पूरे किए। ऑरकुट पर हुई दोस्ती…फिर भोपाल में साथ रहने लगे इधर, पश्चिम बंगाल की रहने वाली आकांक्षा शर्मा (श्वेता) की उदयन से ऑरकुट पर दोस्ती हुई। धीरे-धीरे दोनों करीब आए और वर्ष 2016 में आकांक्षा भोपाल पहुंच गई। वह उदयन के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी। आकांक्षा ने अपने परिवार को बताया कि उसे अमेरिका में नौकरी मिल गई है। असल में वह भोपाल में उदयन के साथ रह रही थी। उदयन भी उसके परिवार से सोशल मीडिया और मैसेज के जरिए संपर्क बनाए रखता था, ताकि किसी को सच्चाई का पता न चले। प्रेमिका के सीने पर बैठा…तकिए से दबाया मुंह, फिर गला घोंटा कुछ समय बाद दोनों के रिश्ते बिगड़ने लगे। आकांक्षा उदयन से दूर जाना चाहती थी। वह अपने दोस्तों से भी बात करती थी, जो उदयन को बिल्कुल पसंद नहीं था। 14 जुलाई 2016 की रात दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ। बहस इतनी बढ़ गई कि आकांक्षा ने गुस्से में उदयन को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद वह सो गई, लेकिन उदयन पूरी रात जागता रहा। उसने उसी रात तय कर लिया कि अब आकांक्षा को जिंदा नहीं छोड़ेगा। 15 जुलाई की सुबह जब आकांक्षा सो रही थी, उदयन उसके सीने पर बैठ गया। उसने तकिए से उसका मुंह दबा दिया। जब आकांक्षा की सांसें कमजोर पड़ने लगीं, तब भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसने हाथों से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद वह कई दिनों तक शव को घर में ही रखे रहा। उसे उम्मीद थी कि शायद आकांक्षा फिर से जिंदा हो जाएगी। जब शव से बदबू आने लगी, तब उसने उसे ठिकाने लगाने की तैयारी शुरू की। लोहे के बक्से में शव रखा… सीमेंट भरकर बना दिया चबूतरा उदयन ने घर में रखे एक बड़े लोहे के बक्से को खाली किया। उसमें आकांक्षा का शव रखा और ऊपर से सीमेंट का घोल भर दिया। इसके बाद कमरे के अंदर ही सीमेंट का चबूतरा बनाकर बक्से को उसमें दबा दिया। सबसे डराने वाली बात यह थी कि वह रोज उसी चबूतरे पर गद्दा बिछाकर सोता था। बदबू छिपाने के लिए कमरे में परफ्यूम छिड़कता था। पुलिस अधिकारियों ने बाद में बताया कि आरोपी बिना किसी डर या पछतावे के उसी कमरे में सामान्य जिंदगी जीता रहा। एक गुमशुदगी ने खोल दिया पूरा राज आकांक्षा के परिवार से कई महीनों तक उसकी बात नहीं हुई। परिवार को शक हुआ तो उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मोबाइल की लोकेशन भोपाल की मिली। जांच करते-करते पुलिस उदयन तक पहुंच गई। शुरुआत में उदयन लगातार झूठ बोलता रहा, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने आकांक्षा की हत्या की बात कबूल कर ली। पुलिस ने कमरे का चबूतरा तुड़वाया तो उसके नीचे से लोहे का बक्सा मिला, जिसमें आकांक्षा का शव सीमेंट में दबा हुआ था। पूछताछ में खुला दूसरा राज… मां-बाप भी जिंदा नहीं थे आकांक्षा हत्याकांड की पूछताछ के दौरान पुलिस ने उदयन से उसके माता-पिता के बारे में सवाल किए। हर बार वह अलग-अलग जवाब देता रहा। इससे पुलिस को शक हुआ। जब सख्ती बढ़ी तो उदयन ने बताया कि उसने कई साल पहले अपने माता-पिता की भी हत्या कर दी थी। इसके बाद रायपुर पुलिस ने सुंदर नगर स्थित घर की खुदाई कराई। आंगन में बने सेप्टिक टैंक के नीचे से दोनों के कंकाल बरामद हुए। रायपुर और भोपाल में चले मुकदमों के बाद अदालत ने उदयन दास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आज वह जेल में है, लेकिन उसका केस आज भी देश के सबसे रहस्यमयी और सनसनीखेज हत्याकांडों में गिना जाता है। छत्तीसगढ़ के साइको किलर की बात होती है तो धमतरी जिले के जितेंद्र ध्रुव का नाम भी लिया जाता है। यह ऐसा अपराधी था, जिसने महज 11 महीने के भीतर पांच लोगों की बेरहमी से हत्या कर पूरे इलाके में दहशत फैला दी। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पता चला कि उसने सिर्फ यही पांच हत्याएं नहीं की थीं, बल्कि तीन साल पहले हुए एक चर्चित ब्लाइंड मर्डर को भी अंजाम दिया था, जिसमें पुलिस किसी और को आरोपी बनाकर जेल भेज चुकी थी। जितेंद्र ध्रुव का मकसद सिर्फ हत्या करना नहीं था। वह चोरी और महिलाओं से रेप की नीयत से सुनसान घरों में घुसता था। विरोध करने पर लोगों को बेरहमी से मार डालता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारियों ने माना था कि अगर वह कुछ दिन और बाहर रहता तो कई और परिवार उजड़ सकते थे। दिन में टाइल्स लगाने का काम करता, रात में बन जाता था शिकारी जितेंद्र ध्रुव धमतरी जिले का रहने वाला था। दिन में वह मजदूरी करता और टाइल्स लगाने का काम करता था। गांव के लोगों के बीच उसकी पहचान एक सामान्य युवक की थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि रात होते ही उसका दूसरा चेहरा सामने आ जाता था। पुलिस जांच में सामने आया कि वह ऐसे घरों की तलाश करता था, जहां महिलाएं अकेली रहती हों या परिवार के लोग कम हों। पहले चोरी की नीयत से घर में घुसता, फिर महिलाओं के साथ रेप की कोशिश करता। विरोध होने पर हत्या कर देता। पहला बड़ा मामला…कृषि अधिकारी पिंगला राज की हत्या 27 अप्रैल 2015 की रात धमतरी जिले के अर्जुनी में रहने वाली ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (ADO) पिंगला राज की हत्या कर दी गई। अगले दिन उनका शव किराए के मकान में मिला। पूरे जिले में सनसनी फैल गई। उस समय पुलिस ने जांच के बाद पिंगला के कथित प्रेमी राकेश चंद्राकर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार करने की बात कही और उसे जेल भेज दिया गया। मामला लगभग बंद माना जाने लगा। लेकिन तीन साल बाद कहानी पूरी तरह बदल गई। गिरफ्तारी के बाद खुद बताया- पिंगला को भी मैंने मारा साल 2017 में जब जितेंद्र ध्रुव पांच अन्य हत्याओं के मामले में पुलिस की गिरफ्त में आया तो पूछताछ के दौरान उसने एक ऐसा खुलासा किया, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया। उसने दावा किया कि पिंगला राज की हत्या भी उसी ने की थी। उसने बताया कि वह उस समय पिंगला के घर के पास ही टाइल्स लगाने का काम कर रहा था। वहीं से उसने घर की पूरी जानकारी जुटाई। रात में चोरी और रेप की नीयत से घर में घुसा। विरोध होने पर पिंगला की हत्या कर दी। उसके इस बयान के बाद पुलिस ने पूरे मामले की दोबारा जांच शुरू की थी। एक परिवार के 3 लोगों का मर्डर, कांप उठा था इलाका जितेंद्र ध्रुव का सबसे चर्चित मामला जुलाई 2017 का था। 12 और 13 जुलाई की रात उसने तेलीनसत्ती गांव में रहने वाले महेंद्र सिन्हा, उनकी पत्नी उषा सिन्हा और बेटे महेश सिन्हा की हत्या कर दी। सुबह जब गांव वालों को घटना की जानकारी मिली तो पूरे इलाके में दहशत फैल गई। एक ही घर में तीन-तीन लोगों की हत्या ने पुलिस पर जबरदस्त दबाव बना दिया। शुरुआती जांच में चोरी की आशंका जताई गई, लेकिन बाद में पुलिस को पता चला कि आरोपी की मंशा सिर्फ चोरी नहीं थी। पूछताछ में जितेंद्र ने बताया कि वह घर में चोरी करने और महिला के साथ रेप करने के इरादे से घुसा था। परिवार के लोगों ने विरोध किया तो उसने तीनों को मौत के घाट उतार दिया। मां-बेटी को भी नहीं छोड़ा इससे पहले 17 अगस्त 2016 की रात उसने खपरी गांव में रहने वाली रुखमणी बाई और उनकी बेटी पार्वती बांडे की हत्या कर दी थी। पुलिस के मुताबिक जितेंद्र का निशाना पार्वती थी। वह उसके साथ रेप करना चाहता था। जब मां-बेटी ने विरोध किया तो दोनों की हत्या कर दी। इन दोनों मामलों में पुलिस लंबे समय तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। हर हत्या के पीछे एक जैसा पैटर्न जांच अधिकारियों ने पाया कि जितेंद्र की लगभग सभी वारदातों का तरीका एक जैसा था। वह पहले दिन में इलाके की रेकी करता। देखता कि किस घर में कौन रहता है और रात में कौन अकेला होगा। देर रात वह घर में घुसता। चोरी करता और महिलाओं के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करता। विरोध करने पर हत्या कर देता और मौके से फरार हो जाता। वारदात के बाद वह फिर सामान्य जिंदगी जीने लगता, जिससे किसी को उस पर शक नहीं होता था। पुलिस रिमांड में खुलते गए राज गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जितेंद्र को रिमांड पर लिया। पूछताछ के दौरान उसने कृषि अधिकारी पिंगला राज की हत्या स्वीकार की तो पुलिस के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया। जिस मामले में पहले एक अन्य व्यक्ति को आरोपी बनाया गया था, उसकी जांच फिर से शुरू करनी पड़ी। धमतरी पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में नई जांच टीम बनाई। जितेंद्र को घटनास्थल ले जाकर पूरे घटनाक्रम का डेमो कराया गया। उसके बयान और मौके से जुड़े साक्ष्यों की दोबारा जांच की गई। यह मामला प्रदेश की उन चर्चित जांचों में शामिल हो गया, जहां गिरफ्तारी के बाद एक पुराने ब्लाइंड मर्डर की नई कहानी सामने आई थी। एक्सपर्ट ने बताया- अपराध की सनक बढ़ती चली गई मामले की जांच के दौरान मनोचिकित्सकों ने भी जितेंद्र के व्यवहार का अध्ययन किया। विशेषज्ञों का कहना था कि ऐसे अपराधियों में हिंसक प्रवृत्ति धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। शुरुआत छोटी घटनाओं से होती है, लेकिन बाद में वे बिना किसी पछतावे के हत्या जैसे अपराध करने लगते हैं। जितेंद्र के मामले में भी यही देखने को मिला। पहली वारदात के बाद उसका आत्मविश्वास बढ़ता गया और फिर उसने एक के बाद एक कई हत्याएं कर डालीं। आज भी जितेंद्र ध्रुव का नाम छत्तीसगढ़ के खौफनाक साइको किलर्स में लिया जाता है। उसकी कहानी यह बताती है कि कई बार एक साधारण दिखने वाला व्यक्ति भी समाज के लिए कितना बड़ा खतरा साबित हो सकता है। सीरियल किलिंग मामलों में दुर्ग जिले के धनोरा निवासी सुखवंत साहू उर्फ सुखू का नाम भी शामिल है। यह मामला इसलिए अलग था, क्योंकि इसमें आरोपी ने किसी निजी रंजिश या सनक में नहीं, बल्कि पैसे और अपना राज छिपाने के लिए सिलसिलेवार हत्याएं कीं। सुखवंत खुद को तांत्रिक बताता था। लोगों से कहता कि वह विशेष पूजा कराकर नोटों की बारिश करा सकता है, बंद किस्मत खोल सकता है और दोगुना पैसा दिला सकता है। उसकी बातों में कई लोग आ गए। जब लोगों ने लाखों रुपए निवेश कर दिए और फिर रकम वापस मांगनी शुरू की, तब सुखवंत ने उन्हें हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया। महज सात दिन के भीतर उसने दो लोगों को गंगाजल में साइनाइड मिलाकर मार डाला। इसके बाद अपने सबसे करीबी साथी की भी हत्या कर दी। पुलिस की जांच में सामने आया कि हत्या का तरीका उसने टीवी पर आने वाले ‘सावधान इंडिया’ कार्यक्रम से सीखा था और साइनाइड ऑनलाइन मंगाया था। कंप्यूटर ऑपरेटर से बना ‘तांत्रिक’, फिर शुरू किया ठगी का खेल सुखवंत साहू पहले कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करता था। धीरे-धीरे उसने तंत्र-मंत्र और पूजा-पाठ के नाम पर लोगों से मिलना-जुलना शुरू किया। वह खुद को ऐसा तांत्रिक बताता था, जो विशेष अनुष्ठान करके किसी को भी मालामाल बना सकता है। वह लोगों को विश्वास दिलाता कि अगर वे पूजा में कुछ लाख रुपए लगाएंगे तो कुछ ही दिनों में रकम कई गुना होकर वापस मिलेगी। कई लोग उसकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आ गए। किसी ने डेढ़ लाख दिए तो किसी ने उससे भी ज्यादा। शुरुआत में वह लोगों को भरोसा दिलाता रहा कि पूजा चल रही है और जल्द ही चमत्कार होगा। लेकिन समय बीतता गया और किसी को पैसा नहीं मिला। पहला शिकार…डेढ़ लाख रुपए वापस मांगे तो मौत दे दी पहला मामला नवा रायपुर निवासी हंसराम साहू (60) का था। हंसराम रिटायर कर्मचारी थे। करीब डेढ़ साल पहले उनकी पहचान सुखवंत से हुई थी। सुखवंत ने उन्हें भरोसा दिलाया कि विशेष पूजा के जरिए उनके पैसे कई गुना हो जाएंगे। हंसराम ने उस पर भरोसा करके करीब डेढ़ लाख रुपए दे दिए। महीनों तक जब कोई फायदा नहीं हुआ तो उन्होंने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू कर दी। सुखवंत को लगा कि अगर उसने पैसे नहीं लौटाए तो पोल खुल जाएगी। उसने हंसराम को पूजा के बहाने बुलाया। 27 नवंबर 2024 को वह अपने साथी बीरेंद्र के साथ हंसराम के घर पहुंचा। पूजा शुरू हुई और पूजा के अंत में उसने गंगाजल में साइनाइड मिलाकर हंसराम को पीने के लिए दे दिया। कुछ ही देर बाद हंसराम की मौत हो गई। बाहर से देखने पर यह सामान्य मौत लग रही थी, इसलिए किसी को तुरंत हत्या का शक नहीं हुआ। दूसरा शिकार… वही तरीका, वही साजिश पहली हत्या के सिर्फ दो दिन बाद सुखवंत ने दूसरी वारदात को अंजाम दिया। इस बार निशाने पर था अभनपुर निवासी नरेंद्र साहू। नरेंद्र ने भी सुखवंत को पूजा के नाम पर डेढ़ लाख रुपए दिए थे। जब उसने अपनी रकम वापस मांगी तो सुखवंत ने उसे भी रास्ते से हटाने की योजना बना ली। 29 नवंबर 2024 की रात उसने नरेंद्र को फोन कर संकरी नर्सरी के पास बुलाया। कहा कि विशेष पूजा करनी है। नरेंद्र पूजा का सामान लेकर पहुंच गया। पूजा पूरी होने के बाद सुखवंत ने उसे गंगाजल दिया। नरेंद्र ने जैसे ही उसे पिया, कुछ देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। अगले दिन उसका शव मिला। शुरुआत में किसी को समझ नहीं आया कि मौत कैसे हुई, लेकिन बाद में जांच में पता चला कि गंगाजल में साइनाइड मिलाया गया था। राज जान गया दोस्त…तो उसे भी मार डाला दो हत्याओं के दौरान सुखवंत के साथ उसका साथी बीरेंद्र देवांगन भी था। बीरेंद्र को पूरी साजिश की जानकारी थी। धीरे-धीरे उसने सुखवंत पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। वह कहने लगा कि अगर पैसा नहीं दिया तो वह पुलिस को सब बता देगा। सुखवंत समझ गया कि अब सबसे बड़ा खतरा उसका अपना साथी बन चुका है। 3 दिसंबर 2024 को उसने बीरेंद्र को मिलने बुलाया। दोनों गंगरेल रोड की तरफ गए। वहां दोनों के बीच विवाद हुआ। गुस्से में सुखवंत ने पत्थर उठाकर बीरेंद्र के सिर पर कई वार किए। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद उसने शव का चेहरा बुरी तरह कुचल दिया, ताकि पहचान न हो सके। शव को सड़क किनारे छोड़कर वह फरार हो गया। मोबाइल कॉल डिटेल ने खोल दी पूरी साजिश बीरेंद्र की हत्या की जांच शुरू हुई तो पुलिस को शुरुआत में कोई बड़ा सुराग नहीं मिला। लेकिन तकनीकी जांच में पुलिस ने बीरेंद्र की मोबाइल कॉल डिटेल निकाली। बार-बार एक ही नंबर सामने आ रहा था- सुखवंत साहू का। पुलिस ने जब सुखवंत की गतिविधियों की जांच की तो पता चला कि वह हंसराम और नरेंद्र के संपर्क में भी लगातार था। बैंक खातों के लेन-देन और कॉल रिकॉर्ड को मिलाया गया तो पूरी कहानी सामने आने लगी। सुखवंत को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पहले वह पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन जब उसके सामने सबूत रखे गए तो वह टूट गया। पूछताछ में बोला- ‘सावधान इंडिया’ देखकर सीखा था हत्या का तरीका पूछताछ के दौरान सुखवंत ने पुलिस को बताया कि उसने टीवी पर आने वाले ‘सावधान इंडिया’ कार्यक्रम में साइनाइड से हत्या का तरीका देखा था। इसके बाद उसने इंटरनेट के जरिए साइनाइड मंगाया। उसका मानना था कि अगर जहर गंगाजल में मिला दिया जाए तो किसी को शक नहीं होगा। पूजा के दौरान लोग बिना सवाल किए उसे पी लेंगे और मौत को सामान्य घटना समझा जाएगा। यही वजह थी कि उसने दोनों हत्याओं में एक ही तरीका अपनाया। सात हत्याओं का दावा…लेकिन पुलिस को नहीं मिले सबूत पूछताछ के दौरान सुखवंत ने पुलिस के सामने दावा किया कि उसने सात लोगों की हत्या की है। उसने दुर्ग जिले के दो अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी दी। पुलिस उसकी निशानदेही पर खुदाई कराने पहुंची, लेकिन वहां कोई शव बरामद नहीं हुआ। इसलिए उन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी। जांच एजेंसियों ने केवल उन्हीं मामलों को आगे बढ़ाया, जिनमें पर्याप्त साक्ष्य मिले। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के भालूकोना गांव में 4 साल तक एक ऐसा हत्यारा खुलेआम घूमता रहा, जिसे गांव वाले गूंगा-बहरा समझते थे। पुलिस भी यही मानकर चल रही थी कि वह सुन और बोल नहीं सकता। लेकिन जब इस मामले का खुलासा हुआ तो पता चला कि यह उसकी सबसे बड़ी चाल थी। वह सब कुछ सुन सकता था, लोगों की बातें समझता था और पुलिस की जांच पर भी नजर रखता था। इस आरोपी का नाम था तेजराम पटेल। पुलिस जांच के मुताबिक उसने 2020 और 2023 में दो महिलाओं की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि उन्होंने उसकी शारीरिक संबंध बनाने की मांग ठुकरा दी थी। पूछताछ में उसने यह भी कबूल किया कि गांव की एक और विधवा महिला उसकी अगली टारगेट थी। अगर पुलिस कुछ दिन और देर कर देती तो गांव में तीसरी हत्या भी हो सकती थी। यह मामला सिर्फ दो हत्याओं का नहीं था, बल्कि पुलिस को चार साल तक गुमराह करने वाले एक ऐसे साइको किलर का था, जिसने अपनी कमजोरी को ही सबसे बड़ा हथियार बना लिया। पहली हत्या…पेड़ से लटकी मिली महिला की लाश 29 मई 2020 को भालूकोना गांव में उस समय सनसनी फैल गई, जब 35 वर्षीय अनुपम बाई का शव महानदी किनारे एक पेड़ से लटका मिला। ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो मामला आत्महत्या का नहीं लग रहा था। महिला के सिर पर गंभीर चोट थी। कपड़े अस्त-व्यस्त पड़े थे। घटनास्थल देखकर साफ था कि पहले उसकी हत्या की गई और फिर शव को पेड़ पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। पुलिस ने कई संदिग्धों से पूछताछ की, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला। महीनों की जांच के बाद भी मामला ब्लाइंड मर्डर बनकर रह गया। 3 साल बाद फिर उसी गांव में दूसरी हत्या पहले केस की फाइल अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि 13 मार्च 2023 को उसी गांव में दूसरी वारदात हो गई। इस बार 56 वर्षीय विधवा गौरी बाई का शव गांव के पनखट्टी तालाब के पास मिला। महिला के सिर और चेहरे पर बड़े पत्थर से कई वार किए गए थे। शव के पास खून से सना लकड़ी का टुकड़ा और घसीटने के निशान भी मिले। दोनों हत्याओं में कई समानताएं थीं। दोनों महिलाएं अकेली थीं। दोनों की हत्या गांव के बाहरी इलाके में हुई थी। दोनों के सिर पर बेरहमी से हमला किया गया था। लेकिन पुलिस के पास हत्यारे तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं था। शराब पार्टी में खुद ही उगल दिया राज समय बीतता गया। पुलिस जांच करती रही, लेकिन सफलता नहीं मिली।फिर एक दिन गांव में शराब पीते समय तेजराम अपने कुछ साथियों के बीच बैठा था। नशे की हालत में उसने इशारों-इशारों में बताया कि दोनों महिलाओं की हत्या उसी ने की है। उसने यह भी इशारा किया कि महिलाओं ने उसकी बात नहीं मानी थी, इसलिए उसने उन्हें मार दिया। यह सूचना मुखबिर के जरिए पुलिस तक पहुंची। इसके बाद पुलिल तेजराम को करीब 12 बार थाने लाया गया। हर बार वह गूंगा-बहरा होने का नाटक करता। पुलिस के सवालों का कोई जवाब नहीं देता। इशारों से ऐसी बातें करता कि जांच अधिकारी भी उलझ जाते। उसे भरोसा हो गया था कि उसकी यह चाल हमेशा काम करती रहेगी। पुलिस उसके सामने जांच की बातें भी करती थी और वह सब सुनकर भी अनजान बना रहता था। 4 साल तक यही उसकी सबसे बड़ी ढाल बनी रही। रायपुर से बुलाया गया साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट जब पुलिस को लगा कि सामान्य पूछताछ से कुछ नहीं होगा, तब रायपुर से साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट राकेश सिंह ठाकुर को बुलाया गया। पूछताछ शुरू हुई तो एक्सपर्ट ने तेजराम के हाव-भाव और आंखों की हरकतों पर ध्यान दिया। कुछ ही देर में उन्हें शक हो गया कि आरोपी पूरी तरह गूंगा-बहरा नहीं है। इसके बाद उसके सामने कुछ शब्द लिखे गए। मृत महिलाओं के नाम लिखे गए। जैसे ही उसने वे नाम पढ़े, उसके चेहरे के भाव बदल गए। यहीं से पुलिस को भरोसा हो गया कि तेजराम पढ़ भी सकता है और सुन भी सकता है। उसके पूरे व्यवहार की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई, ताकि अदालत में यह साबित किया जा सके कि आरोपी जानबूझकर पुलिस को गुमराह कर रहा था। पहली हत्या में पुलिस नहीं पकड़ सकी, तो बढ़ गया हौसला जब उसका झूठ पकड़ा गया तो उसका आत्मविश्वास टूट गया। फिर उसने पहली हत्या की पूरी कहानी बताई। तेजराम ने बताया कि अनुपम बाई से उसके पहले संबंध रह चुके थे। बाद में महिला ने उससे मिलना-जुलना बंद कर दिया था। 29 मई 2020 को उसने गांव के बाहर महिला को अकेला देखा और फिर से शारीरिक संबंध बनाने की मांग की। महिला ने गुस्से में उसे धक्का दिया और गाली देकर वहां से जाने को कहा। बस यही बात उसे नागवार गुजर गई। उसने पास पड़ी मोटी लकड़ी उठाई और महिला के सिर पर कई वार कर दिए। मौत होने के बाद उसने शव को पेड़ से लटका दिया, ताकि मामला आत्महत्या लगे। वही पहली हत्या के बाद जब पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी तो उसका हौसला और बढ़ गया। 13 मार्च 2023 को उसने गांव की विधवा गौरी बाई को अकेला देखा। वह उसके पास पहुंचा और शारीरिक संबंध बनाने की बात कही। गौरी बाई ने विरोध किया और उसे वहां से भगा दिया। इससे तेजराम बुरी तरह भड़क गया। पहले उसने महिला का गला दबाया, फिर पास पड़े बड़े पत्थर से उसके सिर पर कई वार किए। महिला की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद उसने पत्थर तालाब में फेंक दिया। बाद में पुलिस उसे घटनास्थल पर लेकर गई तो उसकी निशानदेही पर वही पत्थर बरामद हुआ। तीसरी हत्या की तैयारी भी पूरी कर चुका था पूछताछ में तेजराम ने पुलिस को बताया कि वह गांव की एक और विधवा महिला पर नजर रखे हुए था। वह उसे भी अपना अगला शिकार बनाना चाहता था। उसने साफ कहा कि अगर वह महिला भी उसकी बात मानने से इनकार करती तो उसकी भी हत्या कर देता। यानी गिरफ्तारी नहीं होती तो गांव में तीसरी वारदात होना लगभग तय थी। बचपन का तिरस्कार बना अपराध की वजह पुलिस जांच में सामने आया कि तेजराम बचपन से ही बोलने में दिक्कत की वजह से लोगों के मजाक का पात्र बनता था। शादी की उम्र निकल गई, लेकिन कोई लड़की उससे शादी करने को तैयार नहीं हुई। धीरे-धीरे उसके भीतर महिलाओं के प्रति गुस्सा और कुंठा बढ़ती गई। उसने अकेली और विधवा महिलाओं को आसान निशाना मानना शुरू कर दिया। पुलिस का मानना था कि उसकी मानसिकता धीरे-धीरे साइको किलर जैसी हो गई थी। पूर्व डीजीपी बोले- समाज में नॉर्मल रहते हैं साइकोपैथ, इसलिए सबूत जुटाना मुश्किल पूर्व डीजीपी डीएम अवस्थी के मुताबिक साइकोपैथ के मामलों में पुलिस के लिए सबूत जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि इन्हें ‘साइको किलर’ के रूप में पहचानना बेहद मुश्किल होता है। ये समाज में इतने नॉर्मल बनकर रहते हैं कि कोई सोच भी नहीं सकता कि ये अपराधी हो सकते हैं। यही वजह है कि वारदात के बाद इनकी जांच उलझ जाती है। वैसे तो इन्हें पहचानना नामुमकिन सा है, लेकिन इनके सामान्य व्यवहार में कहीं न कहीं कुछ ऐसी बारीक गलतियां छूट जाती हैं, जिससे इनके साइकोपैथ होने का सुराग मिल जाता है। पर्सनालिटी डिसऑर्डर के मरीजों में बदला लेने की भावना ज्यादा साइकोलॉजिस्ट ममता जैन कहती हैं कि पर्सनालिटी डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति में एंजायटी (घबराहट) नहीं होती। इस बीमारी की एक वजह पुराना ट्रॉमा (गहरा मानसिक सदमा) भी हो सकता है। ऐसे मरीज बेहद शक्की मिजाज के होते हैं और दूसरों के व्यवहार को लेकर हमेशा चौकन्ने रहते हैं। इनमें बदला लेने की भावना बहुत ज्यादा होती है। ये लोग बेहद सतर्क, कैलकुलेटिव और तेज ऑब्जर्वेशन (पारखी नजर) वाले होते हैं।
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