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रामानुजगंज विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण हेमंत सराफ ने सहायक ग्रेड-2 गौतम सिंह आयम को रिश्वत मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। उन पर 10,000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत सुनाया गया। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि अर्थदंड अदा न करने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से राजेंद्र कुमार गुप्ता ने इस मामले की पैरवी की। अभियोजन के अनुसार, नितेश रंजन पटेल साल 2013 से 2017 तक की 92,000 रुपए की लंबित एरियर राशि प्राप्त करने के लिए कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, वाड्रफनगर पहुंचे थे। वहां पदस्थ सहायक ग्रेड-2 गौतम सिंह आयम ने सेवा पुस्तिका के सत्यापन और एरियर बिल तैयार कर कोष, लेखा-पेंशन कार्यालय अम्बिकापुर में जमा कराने के एवज में 20,000 रुपए रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत मांग की पुष्टि के लिए ट्रैप की तैयारी शिकायतकर्ता रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने आरोपी को रंगे हाथ पकड़वाने के उद्देश्य से एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) अम्बिकापुर में शिकायत दर्ज कराई। एसीबी ने सत्यापन के लिए शिकायतकर्ता को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया। 8 अगस्त 2024 को हुई बातचीत में आरोपी की ओर से रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई, जिसके बाद आरोपी 12,000 रुपए लेने पर राजी हो गया। ट्रैप कार्रवाई में आरोपी रंगे हाथों गिरफ्तार इसके बाद एसीबी ने 13 अगस्त 2024 को ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई और रिश्वत की रकम 12,000 रुपए के साथ आरोपी को पकड़ा गया। जांच और सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों तथा रिकॉर्डिंग के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध पाया। सजा और न्यायिक अभिरक्षा का समायोजन न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं, जिनमें न्यूनतम तीन साल से अधिकतम सात वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। ऐसे मामलों में परिवीक्षा अधिनियम का लाभ नहीं दिया जा सकता। मामले में आरोपी 14 अगस्त 2024 से 13 नवंबर 2024 तक कुल तीन माह न्यायिक अभिरक्षा में रहा। न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत इस अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं।
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