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रायपुर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि सटोरी बाबू खेमानी के जरिए शहर के कई बड़े कारोबारी और रसूखदार लोग सट्टा खेल रहे थे। पुलिस को उसके मोबाइल फोन से स्थायी ग्राहकों की लंबी सूची मिली है, जिसमें कई प्रभावशाली नाम शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, बाबू खेमानी ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क में “आईडी ऑनर” की भूमिका निभा रहा था। वह अलग-अलग नामों से सट्टा खेलने के लिए कई आईडी उपलब्ध कराता था। इन आईडी के जरिए शहर में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसमें करोड़ों का लेन-देन हो रहा था। क्राइम ब्रांच ने बाबू खेमानी को मुंबई से गिरफ्तार कर तीन दिन की रिमांड पर लिया है। सोमवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं उसके भाई करण खेमानी की तलाश जारी है, जो इस पूरे नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था और फिलहाल फरार है। रवि भवन के कारोबारी भी लगाते थे दांव पुलिस सूत्रों के अनुसार बाबू खेमानी के मोबाइल जांच में रवि भवन के कई कारोबारियों की कुंडली सामने आई है। रवि भवन के कारोबारी सट्टा खेलने और खिलाने के सिंडिकेट में इन्वाल्व है। जिन कारोबारियों का नाम सामने आया है, वो कवर और मोबाइल कारोबार के बड़े नाम है। अफसरों का कहना है, कि आने वाले दिनों में पुलिस इन लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाएगी। वसूली के लिए धमकी और दबाव का खेल जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि सट्टे की रकम वसूलने के लिए बाबू और उसके साथियों ने अलग से लोगों को लगा रखा था। पैसे नहीं देने वालों को धमकाया जाता था और कई मामलों में बदनाम करने की धमकी दी जाती थी। सूत्रों के अनुसार, कुछ लोगों से सट्टे के पैसे के बदले सोने के जेवर तक ले लिए गए। सोशल मीडिया का करता था इस्तेमाल बाबू खेमानी खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में पेश करता था। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर उसके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स थे। पुलिस को जानकारी मिली है कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ग्राहकों पर दबाव बनाता था। पैसे नहीं चुकाने वालों को सोशल मीडिया के जरिए बदनाम करने की धमकी देता था। फिलहाल पुलिस आईडी लेने वाले ग्राहकों की भी जांच कर रही है और पूरे नेटवर्क की कुंडली तैयार की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। खुद को ‘सेलिब्रिटी’ समझता था खेमानी पूरे मामले में जांच के दौरान एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है बाबू खेमानी खुद को एक ‘सेलिब्रिटी’ की तरह प्रोजेक्ट करता था। बाबू का असली नाम गुलशन खेमानी है लेकिन बाबू खेमानी के नाम से ही उसे पॉपुलेरिटी मिली। सोशल मीडिया पर उसकी मौजूदगी सिर्फ एक्टिव रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी इमेज बिल्डिंग का हिस्सा थी। वह लगातार हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल को दिखाने वाले पोस्ट करता था महंगी कारें, विदेश यात्राएं, पार्टियां और नेटवर्किंग ताकि फॉलोअर्स के बीच उसकी एक सफल और प्रभावशाली व्यक्ति की छवि बन सके। “प्रिडिक्शन” के नाम पर जोड़ता था लोगों को बताया जा रहा है कि वह आईपीएल मैचों के दौरान “प्रिडिक्शन” के नाम पर लोगों को जोड़ता था और खुद को एक एक्सपर्ट के रूप में प्रेजेंट करता था। आसान भाषा में कहें तो वह खुद को ऐसा व्यक्ति दिखाता था, जिसे मैच का अंदरूनी समझ है और जो सटीक अनुमान लगाकर पैसा कमा सकता है। इसी के जरिए वह लोगों को आसान कमाई का लालच देता था। प्रिडिक्शन और टिप्स के नाम पर फॉलोअर्स को अपने टेलीग्राम लिंक से जोड़ता था, जहां से आगे उन्हें सट्टा नेटवर्क में एंट्री दी जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में उसकी बनाई हुई ‘सेलिब्रिटी इमेज’ ही सबसे बड़ा टूल थी। जिससे लोग उस पर भरोसा करें, उसकी बात मानें और बिना ज्यादा सवाल किए उसके नेटवर्क का हिस्सा बन जाएं।
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