संत बोले-आत्मा में आनंद खोजने वाला ही सच्चा साधक:महावीर स्वामी के आदर्शों पर चलने की दी सीख, चातुर्मास प्रवचन में बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु

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श्री विमलनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट, नाकोड़ा समिति और अद्भुत अनुपम आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मास प्रवचन में सिद्धांत ज्योति जी महारा साहेब ने कहा कि सच्चा सुख और शांति बाहरी चीजों में नहीं, बल्कि अपनी आत्मा में आनंद खोजने से मिलती है। उन्होंने कहा कि संयम, सेवा और स्वाध्याय को जीवन का हिस्सा बनाकर हर व्यक्ति मानसिक और आत्मिक शांति पा सकता है। उन्होंने भगवान महावीर स्वामी के जीवन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि महावीर स्वामी ने माता-पिता के जीवित रहते संन्यास नहीं लेने का संकल्प निभाया। उनके निधन के बाद ही उन्होंने दीक्षा ली। महारा साहेब ने कहा कि महावीर स्वामी का जीवन त्याग, अनुशासन और अपने वचन निभाने की प्रेरणा देता है। हर व्यक्ति को उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास करना चाहिए। समय का महत्व पर चर्चा प्रवचन में उन्होंने समय का महत्व भी बताया। उन्होंने कहा कि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता, इसलिए हर पल का उपयोग अच्छे काम और धर्म के मार्ग पर चलने में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गलती होने पर तुरंत क्षमा मांग लेनी चाहिए। इससे रिश्ते मजबूत होते हैं और मन को भी शांति मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि परमात्मा की भक्ति और ध्यान से जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की ताकत मिलती है। महारा साहेब ने रत्नप्रभा का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे रत्न अपनी चमक और शुद्धता के लिए जाने जाते हैं, वैसे ही इंसान को भी अपने विचार, वचन और कर्म को पवित्र रखना चाहिए। प्रवचन में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने प्रवचन सुना और उसके संदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। अंत में समिति के पदाधिकारियों ने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया।
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