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संजय पार्क में करीब एक महीने पहले कुत्तों के हमले में 15 हिरणों की मौत के मामले में सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई हैं। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ द्वारा बनाई गई जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने बताया है कि पार्क के बाड़े की जाली व दीवार में पहले से छेद बना था और उसे समय रहते ठीक नहीं किया गया। इसके साथ वन विभाग व समिति के बीच समन्वय भी ठीक नहीं था। इससे हिरणों की सुरक्षा की अनदेखी की गई। समिति ने यहां रखे गए हिरणों की संख्या पर भी सवाल हैं, क्योंकि रेस्क्यू सेंटर के नाम पर चलाए जा रहे इस केंद्र में जानवरों को कई सालों से रखा था, जबकि उन्हें समय समय पर जंगल में छोड़ देना चाहिए थे। इससे यहां जानवरों की संख्या में बढ़ोतरी होती गई। सेंटर को भी अवैध बताया है। इससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर संबंधितों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने सेंटर को भी 15 मई तक बंद करने कहा है। यहां अब सेंट्रल जू अथॉरटी से अनुमति लेकर ही किसी बीमार जानवर को रखा जाएगा। पार्क के बाड़े को 15 मई तक बंद करने कहा है। अभी यहां 19 हिरण और 2 नील गाय हैं। इसके अलावा 17 मोर हैं, जो वन्य जीव में आते हैं। इन सभी को जंगल में छोड़ा जाएगा। समिति ने एक रेस्क्यू सेंटर भी बनाने का सुझाव दिया है। इसे देखते हुए पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने विभाग से पार्क व बांसबाड़ी को मिलाकर रेस्क्यू सेंटर के लिए प्रस्ताव बनाकर सेंट्रल जू अथॉरटी भेजने कहा है। वहां से अनुमति मिलने पर ही रेस्क्यू सेंटर चलेगा। ये लंबा प्रोजेक्ट है। तब तक एक अस्थायी सेंटर बनाने प्रयास किया जा रहा है। इसमें बीमार जानवरों को यहां रखकर इलाज किया जा सके। ये भी तब किया जाएगा, जब सेंट्रल जू अथॉरटी इसकी अनुमति दे। संजय पार्क में वन विभाग द्वारा कथित रूप से बनाए गए रेस्क्यू सेंटर में 22 मार्च को 15 हिरणों की मौत हो गई थी। बताया गया था कि बाड़े में आवारा कुत्ते घुस गए थे, जिनके हमले में ये घटना हुई। इसके बाद यहां पदस्थ रहे वनकर्मियों को निलंबित कर समिति को भी भंग कर दिया। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अरूण पांडेय ने मामले की जांच के लिए 2 सदस्यीय टीम गठित की और 15 दिन में रिपोर्ट मांगी थी। ये है पूरा मामला, 2 सदस्यीय टीम ने 15 दिन में सौंपी रिपोर्ट रिपोर्ट के आधार पर भी जिम्मेदारी तय की जाएगी ^जांच रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में सुरक्षा को लेकर कमियां व समिति व विभाग के बीच समन्वय की कमी बताई गई। रिपोर्ट को अध्ययन कर संबंधितों पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। पहले ही इस मामले में पांच वनकर्मियों को निलंबित कर दिया है। हम सरगुजा वन क्षेत्र के अनुसार भी यहां एक रेस्क्यू सेंटर खोलने सेंट्रल जू अथॉरटी को प्रस्ताव भेजेंगे। इसके अनुमति के बिना हम यहां जानवर भी नहीं रखेंगे। अरुण पांडेय, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ, छत्तीसगढ़
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