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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में श्रीराम केयर अस्पताल में पथरी के इलाज के दौरान सरकंडा थाने में पदस्थ आरक्षक सत्यकुमार पाटले की मौत का मामला अब विवादों में घिर गया है। परिजनों के आरोप और हंगामे के बाद जिला प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी है। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और नायब तहसीलदार आकाश गुप्ता ने परिजनों के बयान दर्ज किए। परिजनों ने बताया कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण मरीज की हालत बिगड़ती गई। अस्पताल के डॉक्टरों ने पहले किडनी में इंफेक्शन होने की बात कही थी। जबकि बाद में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं, जिसके चलते सिम्स के चार डॉक्टरों की टीम ने बिसरा जांच कराने की सलाह दी है। परिजनों ने मामले को दबाने की साजिश का आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे। PM रिपोर्ट के बाद असमंजस में प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और किसी तरह का आरोप न लगे, इसलिए सिम्स प्रबंधन ने पोस्टमार्टम के लिए चार डॉक्टरों की टीम गठित की थी। पीएम की पूरी प्रक्रिया का वीडियोग्राफी भी कराई गई है। सोमवार की शाम डॉक्टरों ने पीएम रिपोर्ट पुलिस को दे दी है, जिसमें उन्होंने मौत के कारणों का कोई उल्लेख ही नहीं किया है। डॉक्टरों ने बिसरा प्रिजर्व कर उसकी जांच कराने की राय दी है। इस स्थिति में मजिस्ट्रियल जांच प्रभावित होने की आशंका है। कहा जा रहा कि जब तक मेडिकल के जानकार यानी कि विशेषज्ञ स्पष्ट राय नहीं देंगे, तब तक मामले की जांच आगे नहीं बढ़ सकती। ऐसे में अब बिसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मजिस्ट्रियल जांच हो सकती है। टीआई बोले- पीएम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं टीआई एसआर साहू ने बताया कि सोमवार की देर शाम सिम्स के डॉक्टरों की टीम ने पीएम रिपोर्ट दे दी है, लेकिन इसमें डॉक्टरों ने अलग-अलग राय नहीं दी है। बल्कि सीधे तौर पर बिसरा प्रिजर्व कर सैंपल जांच के लिए भेजने की सलाह दी है। जानिए क्या पूरा मामला ? मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम एरमशाही निवासी सत्यकुमार पाटले (36) पुलिस विभाग में आरक्षक था, उसकी पोस्टिंग सरकंडा थाने में थी। 26 अप्रैल को उसके पेट में असहनीय दर्द हुआ, जिस पर वो इलाज कराने के लिए नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचा। जांच के बाद डॉक्टरों ने पथरी की समस्या बताकर ऑपरेशन कराने की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि श्रीराम केयर अस्पताल में बिना चीरा लगाए सत्यकुमार का आपरेशन किया गया था, जिसके बाद दूसरे दिन वह बिल्कुल ठीक था। अचानक शाम को उसकी तबीयत बिगड़ी, तब करीब चार घंटे तक कोई विशेषज्ञ डाक्टर उसे देखने नहीं आया। आरोप है कि सही समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी हालत गंभीर हो गई, जिसके बाद शुक्रवार दोपहर उसकी मौत हो गई। इस घटना की जानकारी मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए। परिजनों के हंगामा मचाने पर हास्पिटल परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर एफआईआर की मांग परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर लापरवाही बतरने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस गंभीर मामले को अब दबाने की साजिश की जा रही है। यही वजह है कि मामले को टालने के लिए बिसरा प्रिजर्व किया गया है। ताकि, लंबे समय तक जांच चलती रहे। उन्होंने कहा कि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं होगी तो परिजन और समाज के लोग सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
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