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शहर की प्यास बुझाने और हर घर पानी पहुंचाने के लिए पिछले 13 सालों में 826 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन आज भी रायपुर की 25% आबादी तक सरकारी नल नहीं पहुंच पाया है। इन इलाकों के लोग आज भी बोर, टैंकर के भरोसे हैं और पानी लेने के लिए सुबह-शाम जद्दोजहद करनी पड़ती है। रायपुर के कचना, सड्डू, खम्हारडीह, दलदल सिवनी, लाभांडी, जोरा, डूंडा, देवपुरी, डूमतराई, अमलीडीह, हीरापुर, जरवाय ऐसे इलाके हैं, जहां सबसे ज्यादा समस्या है। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि यहां सरकारी नल के लिए लाइन नहीं पहुंची है। वहीं जहां पाइपलाइन बिछ गई है, वहां तक पानी ही नहीं पहुंच पाता। ये क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित
रायपुर निगम में 16 जनवरी को जल बोर्ड का गठन हुआ। बोर्ड ने सबसे पहले शहर में बिछी पाइप लाइन का सर्वे कर जाना कि कहां पानी जाता है और कहां नहीं। रिपोर्ट के अनुसार शहर के 70 में से 35 वार्ड जल प्रभावित हैं। इसमें जोन-3 के सुभाषचंद्र बोस वार्ड 31 के 30-35 जगहों पर समस्या है। ऐसे ही भगवती चरण शुक्ल वार्ड-57 में 8 जगहों पर लाइन नहीं है। जोन-9 में दलदल सिवनी, कचना, जोरा सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र हैं। इसी तरह पंडित रविशंकर शुक्ल वार्ड-34 के 6 से अधिक मोहल्ले में लो प्रेशर एरिया की समस्या है। भास्कर लाइव : ब्रम्हदेव नगर, लाभांडी – सुबह 9 बजे वैसे तो लाभांडी और जोरा पिछले कई सालों से नगर निगम में शामिल है, लेकिन आज भी यहां सुविधाएं शहरी नहीं, बल्कि ग्रामीण है। लोगों को आज भी पेयजल के लिए बोर पर निर्भर होना पड़ता है, लेकिन वो भी गर्मियों में सूख जाते हैं। बुधवार को जब भास्कर टीम यहां पहुंची तो बड़ी संख्या में महिलाएं पानी के लिए टैंकर का इंतजार कर रहीं थीं। सुकुमारी साहू से जब हमने पूछा कि पानी कब तक आता है तो उसने तपाक से कहा- तुमन नाश्ता कर लेव? हमने कहा- हां। इतना सुनते ही सुकुमारी ने कहा- हमारे घर अभी चूल्हा नहीं जला है, क्योंकि पानी ही नहीं है। आज टैंकर के आने का पता चला है, इसलिए घर के बाहर इंतजार में बैठे हैं। इसी तरह थोड़ा आगे बढ़ने पर रेवती बाई से मुलाकात हुई। रेवती ने बताया कि बाकी दिनों में बोर से पानी मिल जाता है, लेकिन गर्मियों में पानी नहीं आता। रोज टैंकर ही आता है, जिससे पानी भरते हैं। कभी टैंकर सही टाइम पर आ जाता है तो कभी देरी से। 15 साल पहले सड्डू निगम में हुआ शामिल, अब बिछेगी पाइपलाइन
निगम में 30 मार्च को प्रस्तुत बजट में जल कार्यों के लिए 104 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसमें शहर की जरूरतों को देखते हुए 37 करोड़ लागत से 150 एमएलडी का नया फिल्टर प्लांट प्रस्तावित है। पेयजल संकटग्रस्त सड्डू में 4500 किली क्षमता वाली टंकी निर्माण, मुख्य लाइन बिछाने का प्रस्ताव है। -मीनल चौबे, महापौर, नगर निगम सीधी बात – विश्वदीप, आयुक्त, नगर निगम रायपुर 13 सालों में 800 करोड़ से अधिक खर्च, लेकिन आज भी कई जगह लाइन नहीं पहुंची?
जनसंख्या बढ़ रही है। पंचायतों का सम्मिलन हुआ है। समय-समय पर इस पर काम किया जाता है। कचना, सड्डू, लाभांडी व फुंडहर जैसे इलाके वर्षों से पानी के लिए जूझ रहे हैं?
सड्डू-कचना के लिए नई टंकी बनाएंगे, जल्द टेंडर कर काम शुरू करेंगे। साथ ही पाइपलाइन का काम होगा। फुंडहर व लाभांडी में 15वें वित्त से पाइपलाइन विस्तार का काम चल रहा है। पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं देने में निगम पीछे क्यों है?
हमारे पास फिल्टर प्लांट भाठागांव में है, जहां से सभी पानी टंकियों को भरा जाता है। इसलिए दूर के इलाकों में पानी टंकी को भरने में समस्या आती है। हर साल टैंकर मुक्त शहर का दावा करते हैं, लेकिन इस बार भी डेढ़ करोड़ का टेंडर जारी किया गया है?
गर्मियों में टैंकर की जरूरत होती है। भूजल स्तर गिरने से बोरवेल से पानी नहीं आता। बस्तियों की सार्वजनिक टंकियों में पानी नहीं भरा पाता। कई बार पाइपलाइन में भी दिक्कत रहती है। इसलिए टैंकर इन आपात स्थितियों में काम आता है।
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