नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर : इंटरनेट मीडिया पर लग्जरी लाइफस्टाइल, फारेन टूर और महंगी कारों के जरिये खुद को सफल इंफ्लुएंसर के रूप में पेश करने वाला बाबू खेमानी (Babu Khemani) अब एक बड़े ऑनलाइन सट्टा (Online Satta King) सिंडिकेट का मास्टरमाइंड निकला है।

रायपुर पुलिस की जांच में पता चला है कि उसका नेटवर्क सिर्फ शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि मुंबई, गोवा समेत देश के कई हिस्सों में फैला हुआ था। तीन दिन की रिमांड में उससे पूछताछ की जा रही है। आरोपित को रविवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। दुबई कनेक्शन के बाद केस में ED की इंट्री को सकती है।
जांच के दौरान सामने आया कि बाबू खेमानी का असली नाम गुलशन खेमानी है। वह सुनियोजित तरीके से ऑनलाइन सट्टेबाजी का मल्टी-लेयर नेटवर्क संचालित कर रहा था। यह कोई सामान्य गिरोह नहीं, बल्कि पूरी तरह संगठित और रणनीतिक ढंग से चलाया जा रहा सिंडिकेट था, जिसमें हर स्तर की अलग भूमिका तय थी।
तीन लेयर में चलता था पूरा नेटवर्क :
पुलिस की पड़ताल में राजफाश हुआ कि खेमानी का सट्टा नेटवर्क तीन अलग-अलग लेयर में काम करता था। प्रत्येक लेयर का उद्देश्य अलग था। कहीं कस्टमर जोड़ना, कहीं सट्टा ऑपरेट करना और कहीं पैसों के ट्रांजेक्शन को छुपाना। इस मल्टी-लेयर सिस्टम से नेटवर्क को लगातार विस्तार दिया जा रहा था। जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश की जाती थी।
प्लेटफार्म बदले, लेकिन धंधा जारी
शुरुआती दौर में ‘मेटो’, ‘कलर 777’ और ‘क्लासिक एक्स 99’ जैसे बैटिंग एप के जरिये सट्टा कारोबार शुरू किया गया। इन प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की आइडी बनाकर मैच के दौरान सट्टा लगाया जाता था। वर्ष 2023 में पुलिस की सख्ती के बाद इन सबको बंद कर दिया गया। लेकिन यह सिर्फ अस्थायी था। इसके बाद खेमानी और उसके साथियों ने नए नामों से दोबारा नेटवर्क खड़ा कर लिया। ‘3 स्टंप्स’ और ‘55 एक्सजेंस’ जैसे नए प्लेटफॉर्म बनाकर पुराने ग्राहकों को फिर जोड़ा गया और नए लोगों को भी इस जाल में फंसाया गया।
दुबई कनेक्शन ने बढ़ाई जांच की गंभीरता :
जांच में बाबू खेमानी का दुबई कनेक्शन भी सामने आया है, जिसने मामले को अंतरराष्ट्रीय आयाम दे दिया है। पुलिस के अनुसार उसकी विदेश यात्राएं सिर्फ घूमने तक सीमित नहीं थीं, बल्कि नेटवर्किंग और संपर्क बढ़ाने का हिस्सा थीं। इसी दौरान उसकी मुलाकात IPL के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी से होने की जानकारी भी सामने आई है।
खेमानी ने इस मुलाकात का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर साझा किया था। हालांकि, इस मुलाकात का सट्टा नेटवर्क से सीधा संबंध है या नहीं, यह अभी जांच का विषय है। ललित मोदी वही शख्स हैं, जिन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत की और इसे एक बड़े व्यावसायिक माडल में विकसित किया। इस कड़ी के सामने आने के बाद पुलिस अब खेमानी के अंतरराष्ट्रीय लिंक और विदेश में उसके संभावित नेटवर्क की भी गहराई से जांच कर रही है।
जांच जारी, और राजफाश की संभावना
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। अन्य आरोपितों की तलाश के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और डिजिटल प्लेटफांर्स की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े राजफाश हो सकते हैं।
तीन लेयर में होता था काम :
पहली लेयर
- इंफ्लुएंसर इमेज से सट्टे की शुरुआत
- बाबू खेमानी इंटरनेट मीडिया पर पहले से सक्रिय था और उसकी अच्छी-खासी फालोइंग थी।
- इस फालोइंग को उसने सिर्फ लाइक्स-व्यूज तक सीमित नहीं रखा।
- इसे सुनियोजित तरीके से ‘टारगेटेड नेटवर्क’ में बदल दिया।
- इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफार्म पर एक्टिव रहकर उसने अपनी एक ‘हाई-प्रोफाइल इमेज’ बनाई।
- फॉलोअर्स के साथ पर्सनल कनेक्ट बनाने की कोशिश की।
- धीरे-धीरे भरोसा कायम किया।
- इसके बाद उसने इसी भरोसे का इस्तेमाल किया।
- हाई-प्रोफाइल और पैसे वाले लोगों को अलग से टारगेट किया गया।
- उन्हें सट्टा खेलने के लिए उकसाया।
दूसरी लेयर
- रायपुर से बाहर शिफ्ट हुआ आपरेशन।
- पुलिस का दबाव बढ़ने पर बाबू खेमानी और नेटवर्क ने रणनीति बदली।
- आपरेशन को एक जगह सीमित रखने के बजाय फैलाने पर फोकस किया गया।
- नेटवर्क को रायपुर से बाहर शिफ्ट किया गया।
- दूसरे राज्यों में विस्तार कर कार्रवाई से बचते हुए कारोबार जारी रखा गया।
- आपरेशन को रायपुर से बाहर शिफ्ट कर दिया गया।
- मुंबई और गोवा को नया ऑपरेशन बेस बनाया गया।
- वहीं से पूरे देश में नेटवर्क फैलाया गया।
- गोवा में मिले ‘लाइन पैनल’ से वहां से सीधे ऑपरेशन होने की पुष्टि हुई।
- वहीं ID बनाई जाती थी। कस्टमर को लॉगिन दिया जाता था।
- लाइव मैच के दौरान वहीं से सट्टा चलता था।
तीसरी लेयर
– म्यूल अकाउंट के सहारे पैसे का पूरा नेटवर्क।
– आपरेटर तक सीधी पहुंच छिपाने के लिए अलग फाइनेंशियल नेटवर्क तैयार किया गया।
– सीधे खातों की बजाय एजेंटों के जरिये जुटाए गए खातों से लेन-देन होता था।
– इन्हीं खातों से करोड़ों का ट्रांजेक्शन कर मनी ट्रेल को कई लेयर में बांटा गया।
– ‘म्यूल अकाउंट सिस्टम’ के तहत लोगों के खाते किराये पर लेकर एक खाते के बदले 20-30 हजार रुपये दिए जाते थे।
– इन खातों का इस्तेमाल सट्टे के पैसे के लेन-देन में किया जाता था।
– कस्टमर से पैसा इन खातों में डलवाया जाता।
– फिर इसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता।
– कई बार कैश निकालकर आगे भेजा जाता।
– जांच में करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन का संकेत मिला है।
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