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अंबिकापुर के बस स्टैंड से लगे रिंगबांध तालाब के 57 डिसमिल जमीन को प्रभावशाली भू-माफियाओं द्वारा पाटकर कब्जा करने के मामले में प्रशासन व नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को नगर निगम का अमला जेसीबी और मशीनें लेकर पहुंचा और पाटी गई मिट्टी को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। पूर्व में प्रशासन ने तालाब को पाटने पर रोक लगा दी थी। रिंगबांध का कुल रकबा प्रशासन के रिकार्ड में 6.25 एकड़ निस्तार मद में दर्ज है। इस तालाब के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया गया है। इसमें से 57 डिसमिल जमीन को माह जनवरी 2026 में विवादित आजाद इराकी के नाम पर रजिस्ट्री करा ली गई थी। इसके बाद भू माफिया तालाब को पाट रहे थे। इस पर कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों ने आपत्ति जताई तो आनन-फानन में अंबिकापुर तहसीलदार ने जमीन पाटने पर रोक लगा दी। यह मामला नगर निगम की सामान्य सभा में भी उठा था। निगम ने तालाब से कब्जा हटाने शुरू की कार्रवाई
नगर निगम ने आजाद इराकी को नोटिस जारी कर तत्काल तालाब पाटने पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। अंबिकापुर तहसीलदार ने भी उक्त जमीन पर किसी भी प्रकार का कार्य करने पर रोक लगाई थी। नगर निगम आयुक्त ने उक्त जमीन में मिट्टी पाटकर कब्जे को हटाने का आदेश दिया था। शनिवार को अंबिकापुर प्रशासन व नगर निगम के अमले ने मिट्टी हटाने का कार्य शुरू कर दिया है। निगम आयुक्तत डीएन कश्यप ने बताया कि तालाब का सीमांकन प्रशासन द्वारा कराया जाएगा। सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत ने सभी तालाबों का सीमांकर कर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। फर्जी मृत्यु प्रमाणत्र से रजिस्ट्री का आरोप
समाजसेवी कैलाश मिश्रा ने खुलासा किया है कि जमीन के असली मालिक की मौत के बाद उसके दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए गए और फौती के लिए आवेदन किया गया। दोनों दस्तावेजों में वारिस अलग-अलग हैं। मामला तलहसील न्यायालय में चल रहा है। 6.25 एकड़ निस्तार भूमि वाले रिंगबांध तालाब में खसरा नंबर 3714, रकबा 57 डिसमिल जमीन पहले कृष्ण बहादुर सिंह के नाम पर दर्ज थी। यह जमीन वर्ष 1982-83 में जयलाल के नाम पर दर्ज हो गई। जयलाल की मृत्यु के दो प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। जिस प्रमाणपत्र के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री हुई है, उसके गवाह में भी जमीन खरीदने वाले आजाद इराकी का नाम व हस्ताक्षर है। मामले की जांच हो रही है और इसमें एफआईआर भी दर्ज हो सकती हैं। जमीन की फर्जी रजिस्ट्री व नामांतरण की जांच प्रशासन कर रहा है। जांच में जलक्षेत्र, फर्जी तरीके से रजिस्ट्री
आलोक दुबे ने अपनी शिकायत में बताया है कि अक्टूबर 2025 में पटवारी श्रवण पांडेय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह जमीन जलक्षेत्र है, इसलिए इसकी सीमांकन (चौहदी) नहीं दी जा सकती। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मौके पर लगभग 6 फीट तक पानी भरा हुआ है। जमीन भराव पर रोक लगाने के लिए दिए गए प्रतिवेदन में आरआई ने भी इसे जलक्षेत्र ही बताया है। पार्षद आलोक दुबे ने बताया कि उक्त रिंग तालाब नगर निगम के 17 तालाबों की सूची में पांचवें नंबर पर दर्ज है। क्या कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
जलभराव, तालाबों के लिए सुप्रीम कोर्ट और छळज् ने कई दिशा निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी भूमि जो जलभराव क्षेत्र या तालाब के रूप में चिन्हित हैं, उन्हें नहीं पाटा जा सकता या उनकी उपयोगिता नहीं बदली जा सकती, भले ही वे निजी भूमि ही क्यों न हों।
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