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आनंद मार्ग प्रचारक संघ रायपुर द्वारा आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी का 105वां आविर्भाव दिवस “आनंद पूर्णिमा महोत्सव” के रूप में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। यह आयोजन ओसीएम चौक स्थित आनंद मार्ग जागृति एवं वृंदावन हॉल में संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में अनुयायी शामिल हुए। शुक्रवार सुबह 6:07 बजे मंगल ध्वनि, जयघोष और आतिशबाजी के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद आवर्त कीर्तन, मिलित साधना और गुरु पूजा आयोजित की गई। इस दौरान श्री श्री आनंदमूर्ति जी का प्रेरणादायक प्रवचन वीडियो के माध्यम से दिखाया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ी, हिंदी, बंगला, अंग्रेज़ी, संस्कृत, उड़िया, तेलगु, भोजपुरी और नेपाली सहित कई भाषाओं में आनंदवाणी पाठ किया गया। इस अवसर पर आचार्य ज्योतिप्रकाशानंद अवधूत ने आनंदवाणी पर विस्तार से उद्बोधन देते हुए कहा कि श्री श्री आनंदमूर्ति जी का जीवन मानव समाज के लिए अद्वितीय और प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1955 में आनंद मार्ग की स्थापना कर बाबा ने वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक जागरण का अभियान शुरू किया और अल्प समय में विश्वभर में आध्यात्मिक चेतना का व्यापक विस्तार किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ आयोजित सुबह 10 बजे वृंदावन हॉल में शिव एवं कृष्ण गीतिका पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। आनंद मार्ग परिवार रायपुर, धनेली और उमरिया के बच्चों ने प्रभात संगीत, नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। बड़ी संख्या में आनंद मार्गी रहे उपस्थित दोपहर 2 बजे ओसीएम चौक में नारायण सेवा एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें 2000 से अधिक लोगों को भोजन कराया गया। शाम 7 बजे मिलित ईश्वर प्राणिधान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर आचार्य रामलाल दानी, आनंद गीता आचार्या, आचार्य अर्पितानंद अवधूत सहित बड़ी संख्या में आनंद मार्गी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की जानकारी रायपुर भुक्ति प्रधान यदुनाथ जी ने दी।
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