रायगढ़ में 32 लाख की धोखाधड़ी का फरार आरोपी गिरफ्तार:फर्जी बिल-वाउचर बनाकर घटना को दिया अंजाम, फरार अन्य आरोपियों की तलाश जारी

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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करने वाले दो युवकों ने मिलकर 32 लाख की धोखाधड़ी की। फर्जी बिल-वाउचर बनाकर आरोपियों ने घटना को अंजाम दिया। जब इसकी जानकारी कंपनी के संचालक को लगी, तो उसने थाना में शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद से आरोपी फरार थे। जहां पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र की है। मिली जानकारी के मुताबिक 24 मार्च 2026 को श्रीराम ट्रांसपोर्ट ढीमरापुर चौक रायगढ़ के संचालक कमल किशोर शाह ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके यहां कार्यरत प्रकाश मिश्रा व दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे। भुगतान के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर मिलने पर इसकी जांच की गई, जिसमें सितंबर 2025 से लगातार फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पाया गया कि एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर तैयार कर भुगतान कराया गया। संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ व प्रियंका गुप्ता के खातों का उपयोग कर कंपनी से करीब 32 लाख की राशि धोखाधड़ी से निकाली गई। ऐसे में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर मामले में विवेचना शुरू की। जहां जांच के दौरान प्रस्तुत बिल-वाउचरों में अंकित वाहन नंबरों का सत्यापन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से कराया गया। जांच में कई वाहन नंबर दोपहिया व छोटे निजी वाहनों के निकले। जिनका श्रीराम ट्रांसपोर्ट व माल परिवहन काम से कोई संबंध नहीं था।
दारेगापारा से आरोपी को पकड़ा गया
वाहन स्वामियों ने भी पुलिस को स्पष्ट बताया कि उन्होंने कभी उस ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए कोई परिवहन काम नहीं किया। ऐसे में पुलिस ने फरार आरोपियों की लगातार तलाश की जा रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि फरार आरोपी दीपक शर्मा 32 साल निवासी दरोगापारा अपने मोहल्ले में देखा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल दबिश देकर उसे हिरासत में लिया।
कमीशन काटकर राशि भेजते थे
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह श्रीराम ट्रांसपोर्ट में कार्यरत ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करता था और अलग-अलग वाहन नंबरों का उपयोग कर भुगतान करवाता था। आरोपी दीपक शर्मा ने बताया कि जिन लोगों के खातों में राशि भेजी जाती थी, वे कमीशन काटकर शेष रकम वापस उसके और प्रकाश मिश्रा द्वारा बताए गए बैंक खातों, क्यूआर कोड व फोन-पे नंबरों पर ट्रांसफर कर देते थे।
आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया
आरोपी के अनुसार करीब 32 लाख की धोखाधड़ी में से लगभग 16-17 लाख प्रकाश मिश्रा व दीपक प्रधान को दिए गए, जबकि उसे लगभग 15 लाख प्राप्त हुए, जिनमें से करीब 4 लाख उसने अपनी मां के इलाज में और शेष राशि घूमने-फिरने व व्यक्तिगत खर्चों में खर्च कर दी। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। वहीं मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
पुलिस का अभियान लगातार जारी
SSP शशि मोहन सिंह ने बताया कि फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत लगातार अभियान चला रही है। व्यापारियों और आम नागरिकों के विश्वास से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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