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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में तेंदूपत्ता संग्रहण नहीं कर पाने और शासन की योजना का लाभ नहीं मिलने से ग्रामीणों ने आंदोलन कर दिया। सुबह गारे के 4/6 माईंस के सामने धरना प्रदर्शन किया, जिससे चक्काजाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई। बाद में विभागीय अधिकारियों ने आकर लिखित में आवेदन देने और उनकी समस्याओं का निराकरण करने का आश्वसन दिया। जिसके करीब 6 घंटे बाद उनका आंदोलन समाप्त हुआ। शुक्रवार की सुबह तकरीबन 6 बजे गारे गांव के ग्रामीण 4/6 जिंदल माईंस के सामने इक्ट्ठा हुए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि पहले वे तेंदूपत्ता संग्रहण करते थे और उससे शासन की योजना का उन्हें लाभ मिलता था, लेकिन माईंस के शुरू होने के बाद से तेंदूपत्ता का क्षेत्र विलोपित हो गया। इससे वे तेंदूपत्ता तोड़ नहीं पा रहे हैं और कई योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों के काफी संख्या में इक्ट्ठा होने से वहां चक्काजाम जैसी स्थिति निर्मित हो गई। दोनों ओर से आने-जाने वाली वाहनों की कतार भी लगने लगी। जब मामले की जानकारी पुलिस व वन विभाग के अधिकारियों को लगी, तो कंपनी, पुलिस और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाईश देने लगे। जहां उनकी समस्याओं का निराकरण करने का आश्वसन दिया गया। ऐसे में करीब 12 बजे ग्रामीणों का आंदोलन समाप्त हो गया।
मुआवाजा की मांग को लेकर किया आंदोलन
गारे गांव के सरपंच रवि शंकर सिदार ने बताया कि माईंस के आ जाने से ग्रामीण तेंदूपत्ता योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। जिसके कारण आर्थिक नुकसान भी तेंदूपत्ता संग्रहको को हो रहा है। ऐसे में मुआवजा की मांग को लेकर आंदोलन किया गया। जहां अधिकारियों ने आश्वसन दिया है। लिखित में आवेदन भी प्रबंध संचालक जिला युनियन के नाम दिया गया है। उच्चाधिकारियों को आवेदन भेजा जाएगा
इस संबंध में रेंजर विक्रांत कुमार ने बताया कि ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन की जानकारी लगने के बाद मौके पर पहुंचकर उन्हें समझाईश दिया गया है। उनके द्वारा लिखित में एक आवेदन दिए हैं, जिसे उच्चाधिकारियों को भेज कर मामले से अवगत कराया जाएगाा और उनके निर्देश पर आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
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