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Home » राजस्व बोर्ड के आदेश पर 6 साल तक नहीं बांटा खेत, हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ तहसीलदार को लगाई फटकार
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राजस्व बोर्ड के आदेश पर 6 साल तक नहीं बांटा खेत, हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ तहसीलदार को लगाई फटकार

By adminMay 23, 2026No Comments2 Mins Read
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22 05 2026 high courtcg
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने निचली अदालतों और तहसील स्तर पर जारी प्रशासनिक लालफीताशाही व फाइलों को अटकाने की प्रवृत्ति पर बेहद कड़ा प्रहार किया है। …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 22 May 2026 12:17:56 PM (IST)Updated Date: Fri, 22 May 2026 12:17:56 PM (IST)

राजस्व बोर्ड के आदेश पर 6 साल तक नहीं बांटा खेत, हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ तहसीलदार को लगाई फटकार

HighLights

  1. राजस्व मंडल के फैसले को 6 साल दबाए बैठा रहा तहसीलदार।
  2. प्रशासनिक लालफीताशाही पर जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास हुए नाराज।
  3. पैतृक भूमि के बंटवारे के लिए अब 4 महीने में निराकरण का अल्टीमेटम।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राजस्व मंडल के आदेशों की अनदेखी करने और निचली अदालतों की निष्क्रियता पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब राज्य की सर्वोच्च राजस्व अदालत कोई आदेश जारी करती है, तो कनिष्ठ अधिकारियों का यह वैधानिक कर्तव्य है कि वे बिना किसी नए आवेदन का इंतजार किए उसका पालन करें।

न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने मुंगेली जिले के जरहागांव के एक लंबित बंटवारा मामले में तहसीलदार की लापरवाही को प्रशासनिक मनमानी और लालफीताशाही करार देते हुए चार महीने के भीतर बंटवारे की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश दूजाबाई द्वारा दायर रिट याचिका पर जारी किया गया।

याचिकाकर्ता ने वर्ष 2012 में पैतृक भूमि के बंटवारे के लिए आवेदन किया था। मामले में राजस्व मंडल ने 14 दिसंबर 2020 को ही याचिकाकर्ता के पक्ष में बंटवारा करने का साफ आदेश जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद तहसीलदार ने 6 साल तक कोई कार्यवाही नहीं की। शासन के इस तर्क पर कि पक्षकार ने नया आवेदन नहीं दिया था, कोर्ट ने तीखी नाराजगी जताई।

हाई कोर्ट ने जरहागांव तहसीलदार को चार महीने के भीतर बंटवारा संपन्न करने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही आदेश की प्रति राजस्व सचिव और बिलासपुर कमिश्नर को भेजकर प्रदेश के सभी राजस्व अधिकारियों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है ताकि भविष्य में ऐसी लेटलतीफी न हो।



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