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राजनांदगांव जिले में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर शिवनाथ नदी के अस्तित्व और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर मंडराते खतरे ने तूल पकड़ लिया है। जिला पंचायत सदस्य विभा साहू के नेतृत्व में हुए विरोध के बाद क्षेत्र की एक प्रमुख औद्योगिक इकाई को पीछे हटना पड़ा है। कंपनी ने अब दूषित पानी का बहाव रोकने का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीण सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं हैं। जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 5 अर्जुनी की सदस्य विभा साहू ने झींका स्थित धनलक्ष्मी पेपर मिल और पेट फूड कंपनी पर आरोप लगाया कि वे औद्योगिक अपशिष्ट और दूषित पानी सीधे शिवनाथ नदी में बहा रही थीं। इससे नदी का पानी तेजी से प्रदूषित हो रहा था। गांवों पर सीधा असर: नहाने और पीने लायक नहीं बचा पानी इस प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर ग्राम सुखरी, बरसनटोला और आसपास के निचले इलाकों में देखने को मिला। ग्रामीणों के अनुसार, नदी का पानी इतना दूषित हो गया था कि न तो लोग इसका उपयोग कर पा रहे थे और न ही मवेशियों के लिए यह सुरक्षित रह गया था। बताया गया कि रासायनिक तत्वों से भरे पानी के कारण मवेशी बीमार पड़ रहे थे, वहीं जमीन में रिसाव से भूजल भी प्रभावित हो रहा था। पहले भी दी गई थी चेतावनी, नहीं हुआ असर विभा साहू ने बताया कि करीब दो महीने पहले भी कंपनियों को चेतावनी दी गई थी, लेकिन प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद मामला लगातार बढ़ता गया और ग्रामीणों में आक्रोश पनपने लगा। वायरल वीडियो के बाद बढ़ा दबाव, आंदोलन की चेतावनी सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और ग्रामीणों की बैठक के बाद विभा साहू ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि अगर तुरंत प्रदूषण नहीं रोका गया, तो उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी। कंपनी का यू-टर्न: दूषित पानी बहाना रोका ग्रामीणों के बढ़ते विरोध और दबाव के बाद ढुल्स पेट फूड कंपनी ने नरमी दिखाई है। कंपनी ने ग्राम पंचायत सुखरी को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि नाली के माध्यम से दूषित पानी बहाने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई है। कंपनी ने यह भी आश्वासन दिया है कि भविष्य में जल शोधन के सभी मानकों का पालन किया जाएगा और स्थानीय लोगों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। प्रशासन की नजर, ग्रामीणों का साफ संदेश फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। हालांकि ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल कागजी आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। उन्हें जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई, तो मामला उच्च स्तर तक ले जाया जाएगा और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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