नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। डिजिटल क्रांति के इस दौर में साइबर अपराधी ठगी की रकम को सुरक्षित रूप से ठिकाने लगाने और खुद को बचाने के लिए युवा बेरोजगारों, छात्रों और गरीब मजदूरों को मोहरा बना रहे हैं। इनकी जरूरतों का फायदा उठाकर अपराधी महज 5-10 हजार रुपये में इनके खाते और सिमकार्ड ले लेते हैं और खुद उनका संचालन कर ठगी की रकम सुरक्षित करते हैं। इसका खुलासा जिले के थानों में दर्ज 13 मामलों की जांच में हुआ है, जिनमें मजदूर और छात्रों सहित ऐसे 30 लोगों के खाते शामिल हैं।
म्यूल अकाउंट के खिलाफ हुई संयुक्त जांच में सामने आया है कि इस काले खेल की गिरफ्त में आर्थिक तंगी या अज्ञानता के शिकार लोग हैं। पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए ठग स्थानीय छात्रों, ग्रामीणों और बेरोजगारों को अपना ‘मोहरा’ बना रहे हैं।
जांच में खुले ठगी के ये तीन मुख्य -टारगेट वर्ग
कॉलेज छात्र: शहर के मंगला, कोनी और कोचिंग हब में रहकर पढ़ाई करने वाले मध्यमवर्गीय छात्र महंगे शौक, पॉकेट मनी और ऑनलाइन गेमिंग की लत के कारण आसानी से जाल में फंस रहे हैं। इन्हें ””पार्ट टाइम जॉब”” के नाम पर हर महीने 5 से 10 हजार का लालच दिया जाता है। इसमें दूसरे शहरों से आकर रहने वाले छात्र भी शामिल हैं।
मजदूर व ग्रामीण वर्ग: शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के सीधे-साधे व कम पढ़े-लिखे मजदूर। इन्हें लोन दिलाने या सरकारी योजना का लाभ दिलाने के बहाने झांसा देकर इनके दस्तावेज ले लिए जाते हैं।
बेरोजगार युवा: नौकरी की तलाश में भटक रहे युवा, जो ‘वर्क फ्रॉम होम’ के फर्जी विज्ञापनों के चक्कर में आकर कमीशन के लालच में अपने खाते सौंप देते हैं।
ऐसे बुना जाता है ठगी का जाल
रिटायर्ड डीएसपी अनिल तिवारी ने बताया कि किराये पर खाते लेने का खेल तीन चरणों में होता है। सबसे पहले अपराधियों द्वारा इन जरूरतमंद वर्गों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाता खुलवाया जाता है। खाता खुलते ही उसकी पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम और नेट बैंकिंग का पासवर्ड ठग अपने कब्जे में ले लेते हैं। इसके बाद देश के किसी कोने में बैठे पीड़ित से ठगी गई रकम सीधे इसी म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर कराई जाती है और पलक झपकते ही उसे एटीएम या क्रिप्टो करेंसी के जरिए निकाल लिया जाता है।
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई
60 गिरफ्तार: साइबर सेल और थानों की पुलिस ने संगठित गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अब तक 60 आरोपियों को दबोचा है।
22 सलाखों के पीछे: मुख्य हैंडलर्स और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले 22 आरोपी जेल में बंद हैं, जिनकी जमानत याचिकाएं कोर्ट से खारिज हो चुकी हैं।
30 से अधिक को जमानत: अज्ञानता में खाता सौंपने वाले करीब 30 खाताधारकों (छात्र/मजदूर) को कोर्ट से सशर्त जमानत मिली है।
करोड़ों का ट्रांजैक्शन: तारबाहर पुलिस और साइबर थाने की जांच में उत्कर्ष व एक्सिस बैंक के संदिग्ध खातों से करीब 10 करोड़ से अधिक का अवैध लेन-देन उजागर हुआ है।
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13 में से तीन बड़ी कार्रवाईयां
17 मई 2025: साइबर रेंज पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिये करोड़ की ठगी के मामले में एक बैंककर्मी सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों ने 5 से 10 हजार रुपये के लालच में आकर अपने बैंक खाते ठगों को किराए पर दिए थे। इनमें छात्र और मजदूर शामिल थे।
26 फरवरी 2025: बिलासपुर पुलिस ने ऑनलाइन साइबर फ्रॉड के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाकर 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक के कर्मचारी भी शामिल थे, जिन्होंने फर्जी अकाउंट्स के जरिये करोड़ों का लेनदेन किया था।
17 मई 2026: तारबाहर पुलिस ने अंबिकापुर से ‘म्यूल अकाउंट’ सिंडिकेट के तीन आरोपियों (नवनीत, ऋषभ और राजा) को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी मास्टरमाइंड दीपेश गुप्ता के साथ मिलकर देश भर में ठगी के खातों का नेटवर्क चला रहे थे। इन खातों से ₹71 लाख का ट्रांजैक्शन और 60 से अधिक शिकायतें दर्ज मिली हैं।
सह-आरोपित मानता है कानून
पुलिस अब ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111 (संगठित अपराध) के तहत कार्रवाई कर रही है। खाता आपका है, तो कानूनी तौर पर पहली जिम्मेदारी आपकी है। किसी अजनबी को अपना खाता या एटीएम सौंपना आपको सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है। कानून आपको सह-आरोपित मानता है।
वर्जन
साइबर अपराधी युवाओं और आम लोगों को पैसों का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम, चेकबुक और सिम कार्ड का उपयोग साइबर अपराधों में करते हैं। घर बैठे कमाई, एकाउंट ऑन रेंट’ और ‘बैंक एकाउंट फॉर इनकम”” जैसे ऑफरों से सावधान रहें। कभी भी अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या सिम किसी को किराये या कमीशन पर न दें। पंकज कुमार पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
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