![]()
बारात आ चुकी थी। रिश्तेदार शादी की रस्मों में जुटे थे, लेकिन जांजगीर-चांपा जिले के कोसमंदा गांव में 23 जून की शाम दुल्हन बनी मुस्कान प्रधान के कड़े फैसले ने सब कुछ बदल दिया। उसने दूल्हे को नशे में लड़खड़ाते देख रस्में आगे न बढ़ाने का फैसला कर शादी बी
.
एसपी विजय कुमार पांडेय ने मुस्कान के हौसले की तारीफ की। उन्हें नशा मुक्ति अभियान का यूथ आइकन बनाया गया और महिला परिवार परामर्श केंद्र में मानदेय के साथ जिम्मेदारी देने की घोषणा की गई। उस दिन जो हुआ उस बारे में मुस्कान ने भास्कर से पूरी घटना साझा की। यहाँ उस दिन की कहानी, मुस्कान की जुबानी…
पिता के जाने के बाद मां ने हम 4 बच्चों को पाला, मेरे फैसले में वो साथ रही
द्वार पूजा के लिए जैसे ही दूल्हा पहुंचा, वह अपने पैरों पर ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। दूल्हा शराब के नशे में लड़खड़ा रहा था। उसे चार लोग संभाले थे, तब वह खड़ा हो सका। लड़खड़ाते देख मुझे उसके साथ सात फेरे लेना मंजूर नहीं था। मैंने साफ कह दिया- ‘मैं शादी नहीं करूंगी।’
कुछ ही मिनटों में माहौल तनावपूर्ण हो गया। दोनों परिवार आमने-सामने आ गए, लेकिन मैं अडिग थी। मुझे एक ही बात समझ आई थी, अगर आज चुप रही, तो पूरी जिंदगी पछताना पड़ेगा। जिस लड़के को चार लोग संभाल रहे थे, वो मेरा जीवन कैसे संभालता-संवारता।
मेरे फैसले में सबसे बड़ी ताकत मां बनी। मां ने लंबा संघर्ष किया है। जब मैं छोटी थी, तभी पिता का निधन हो गया। घर की पूरी जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। मजदूरी कर उन्होंने मेरी, दो बहनों और मेरे भाई की परवरिश की। गरीबी थी, लेकिन मां ने हमें इतना जरूर सिखाया कि इज्जत और आत्मसम्मान से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता। शायद यही वजह थी कि जब शादी वाले दिन मैंने दूल्हे को नशे में लड़खड़ाते देखा, तो उसने समाज या रिश्तेदारों की परवाह नहीं की।
जब संत कुमार का रिश्ता आया और बात आगे चली थी, तब हमने पूछा था कि शराब पीते हो? उसने कहा था- नहीं। तब लड़का ठीक लगा था, इसलिए रिश्ता तय हो गया। सगाई वाले दिन पहली बार शक हुआ। उस दिन भी लड़का शराब पीकर आया था। हालांकि, तब हालत खराब नहीं थी। परिवार में इस बात पर चर्चा हुई। तब मां ने शादी रोकने की बात भी कही, लेकिन मैंने सोचा कि शायद वह गलती सुधार लेगा, इसलिए मौका दिया। अब दूसरा मौका नहीं दूंगी। 10वीं बाद मेरी पढ़ाई छूट गई थी। मैं आगे पढ़ना चाहती हूं। किताबों से मुझे लगाव है।
फिर से पढ़ाई करना चाहती हूं, मेरी जैसी गलती न करें
10वीं के बाद मजबूरी में पढ़ाई छोड़ने वाली मुस्कान अब फिर से किताबों की ओर लौटना चाहती है। उन्हें पढ़ना बहुत पसंद है। अब अगर प्रशासन मुझे मौका दे रहा है तो मैं जरूर पढूंगी और जितना आगे जा सकूंगी, जाऊंगी मुस्कान के लिए अब जिंदगी की नई शुरुआत शादी से नहीं, शिक्षा से होगी। वह कहती हैं: मेरे जैसी गलती कोई और लड़की न करे। शादी तय करने से पहले सिर्फ रिश्तेदारों की बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
<
