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महज 12 साल की सुमना कुंडू ने इस दुनिया को अलविदा कहने के बाद दो जरूरतमंद मरीजों को नया जीवनदान दिया। गंभीर बीमारी पिक्नोडाइसोस्टोसिस से पीड़ित सुमना को 29 मई को एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया था। नौ दिनों तक आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद सुमना को ब्रेन डेड घोषित किया गया। दुख की इस घड़ी में पिता लक्ष्मण कुंडू और माता सरस्वती कुंडू ने साहसिक निर्णय लेते हुए बेटी की दोनों किडनी दान करने की सहमति दी। प्रत्यारोपण समन्वयक अम्बे पटेल और विनीता पटेल की काउंसलिंग के बाद स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन के निर्देशों के अनुसार अंगों का आवंटन किया गया। किसी बच्चे का अंगदान का प्रदेश में यह दूसरा मामला है। रेयर बीमारी पिक्नोडाइसोस्टोसिस से पीड़ित थी सुमना, दुनियाभर में इसके 500 से भी कम मामले
सुमना एक रेयर जैनेटिक बीमारी पिक्नोडाइसोस्टोसिस से ग्रसित थीं। ये ऐसी बीमारी, जिसके दुनियाभर में 500 से भी कम मामले सामने आए हैं। इसमें हड्डियां असामान्य रूप से घनी, लेकिन कमजोर हो जाती हैं। दिमाग का विकास भी सही तरीके से नहीं होता। सुमना को इसके साथ मस्तिष्क में बढ़े दबाव और आंखों की नसों को नुकसान जैसी गंभीर जटिलताएं भी थीं, जिसके कारण उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई थी। उसके मस्तिष्क की पहले भी सर्जरी की गई थी। अंगदान से इन्हें मिला नया जीवन
एक किडनी टाटीबंध निवासी 15 वर्षीय किशोर को, जो तीन वर्षों से डायलिसिस पर था। वहीं दूसरी किडनी रायपुर के ही 45 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया, जो पांच साल से डायलिसिस पर थे। एम्स में सात घंटे की लंबी और जटिल प्रत्यारोपण सर्जरी के बाद दोनों ही मरीज स्वस्थ हैं और चिकित्सकों की निगरानी में हैं। प्रत्यारोपण सर्जरी में यूरोलॉजी विभाग के डॉ. अमित आर. शर्मा, डॉ. दीपक बिस्वाल, डॉ. राघवेंद्र, नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. विनय राठौर व डॉ. नीलम मरावी सहित टीम शामिल रहीं। भाई बोला- डॉक्टरों ने कहा, वो दो लोगों को बचा सकती है, तो हम तुरंत मान गए साल 2021 की बात है। सुमना 8 साल की थी और हमें बीमारी के बारे में पता चला। शुरुआती दिनों में ही चिकित्सकों ने उसकी बीमारी के संबंध में हमें सभी बातें बता दी। फिर भी उसके इलाज के लिए कोलकाता, रायपुर एम्स और चेन्नई तक गए। जब उसे दर्द होता तो उसके साथ-साथ हम सब तड़पते थे। मैं, मां और सुमना पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के कमलपुर गांव में रहते थे और पिता लक्ष्मण कुंडू रायपुर में फास्ट फूड का काम करते थे। गांव के स्कूल से ही सुमना ने पांचवीं तक पढ़ाई की। अभी जब एम्स रायपुर में एडमिट किया, तब बहुत ज्यादा क्रिटिकल स्थिति थी। इसके बारे में शुरुआत में ही चिकित्सकों ने हमें जानकारी दी थी। एम्स में ही जब चिकित्सकों ने प्रत्यारोपण से दो लोगों को नई जिंदगी मिलने की बात बताई तो हम तुरंत अंगदान के लिए मान गए। क्योंकि डॉक्टरों ने हमें बता दिया था कि ब्रेन डेड होने का मतलब वो अब साथ नहीं है।
– जैसा सुमना के बड़े भाई सुरजीत कुंडू (19) ने बताया।
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