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कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक के ग्राम पंचायत बोरगांव (पूर्वी) से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यहां एक मां के संघर्ष और त्याग ने उनके बेटे मनीष साहू को डॉक्टर बनाया है। मनीष ने आरएसडीकेएस शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनने का सपना साकार किया है। मनीष जब छठवीं कक्षा में थे, तभी उनके पिता रामकुमार साहू का निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई थी। कई बार पूरे महीने का खर्च केवल 500 रुपए में चलाना पड़ता था। इस कठिन समय में उनकी मां ने हार नहीं मानी। उन्होंने परिवार को संभाला और बच्चों के सपनों को जीवित रखा। मनीष बताते हैं कि उनकी मां ने कभी गरीबी को उनके सपनों के आड़े नहीं आने दिया और हमेशा उन्हें बड़ा सोचने की सीख दी। मां की प्रेरणा और भगवत गीता से मिली ताकत मां की प्रेरणा से मनीष ने डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय किया। उन्हें मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कई बार असफलता मिली और कुछ अंकों से चयन छूट गया। लेकिन मां का भरोसा और भगवत गीता से मिली मानसिक शक्ति ने उन्हें लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। आखिरकार मनीष ने अपना लक्ष्य हासिल किया। डॉ. मनीष साहू अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां को देते हैं। उन्होंने अपनी दीक्षांत समारोह में मिली कैप अपनी मां को पहनाकर उनका आशीर्वाद लिया, जो उनके प्रति कृतज्ञता का प्रतीक था। यह कहानी हर उस मां के संघर्ष और विश्वास को समर्पित है, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर चुनौती का सामना करती है।
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