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मनेन्द्रगढ़ जिला मुख्यालय से निकलने वाली हसिया नदी शहर के गंदे पानी के कारण पूरी तरह दूषित हो गई है। नदी को साफ करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) योजना ठंडे बस्ते में है और अब तक इसका काम शुरू नहीं हो पाया है। कभी जीवनदायिनी मानी जाने वाली यह नदी अब एक गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है। शहर के घरों से निकलने वाला दूषित पानी और सीवेज सीधे नालों के माध्यम से इस नदी में बहाया जा रहा है। एक समय था जब इस नदी के पानी का उपयोग पीने और दैनिक कार्यों के लिए होता था, लेकिन अब यह निस्तार के लायक भी नहीं बचा है। सफाई के लिए 8 करोड़ 87 लाख रुपये की योजना, पर सफाई गायब नदी के किनारों पर कचरे का ढेर देखा जा सकता है। नदी की सफाई के लिए 8 करोड़ 87 लाख रुपये की एक योजना बनाई गई थी। इसका वर्क ऑर्डर भी जारी हो चुका है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। जल्द ही कार्य की शुरुआत हो जाएगी:नगरपालिका अध्यक्ष इस संबंध में मनेन्द्रगढ़ की नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिमा यादव ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 16 फरवरी को इस परियोजना का भूमिपूजन किया था। ठेकेदार द्वारा सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है और जल्द ही कार्य की शुरुआत हो जाएगी। अधिकारियों के बीच सही तालमेल की कमी वहीं, विपक्ष का मानना है कि अधिकारियों के बीच सही तालमेल न होने के कारण एसटीपी का कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। विपक्ष ने यह भी बताया कि इस परियोजना को पूर्व कार्यकाल में भी स्वीकृति मिली थी और तब भी इसका टेंडर हुआ था, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका था। मुख्यमंत्री द्वारा दोबारा भूमिपूजन किए जाने के इतने महीनों बाद भी काम शुरू न होना चिंताजनक है।
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