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1 मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर दुर्ग में राजनीतिक बयानबाजी गरमा गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश के मंत्री गजेंद्र यादव के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। दोनों नेताओं ने प्रदेश के नेतृत्व, श्रमिकों के मुद्दों, विकास योजनाओं और शासन व्यवस्था पर एक-दूसरे पर निशाना साधा। दुर्ग के राजीव भवन में पारंपरिक ‘बोरे बासी’ खाकर श्रमिकों को शुभकामनाएं देते हुए भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल को “कुशासन” बताया। उन्होंने आरोप लगाया, “यह समझ नहीं आ रहा कि सरकार कौन चलाता है, यह सरकार छत्तीसगढ़ से नहीं बल्कि गुजरात के अहमदाबाद से चल रही है।” मंत्री गजेंद्र यादव ने भूपेश बघेल के “अहमदाबाद” वाले बयान पर पलटवार किया। उन्होंने पूछा, “वो हमारी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, पहले बताएं उनकी सरकार कहां से चलती थी?” यादव ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय छत्तीसगढ़ को “एटीएम” की तरह इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा, “जहां-जहां चुनाव हुआ करता था, वहां-वहां भूपेश बघेल ही चुनाव प्रभारी होते थे। छत्तीसगढ़ का पैसा कांग्रेस ने पूरे देश में लगाया, जिसका दुष्प्रभाव यह रहा कि छत्तीसगढ़ में कोई भी डेवलपमेंट का काम नहीं हो पाया।” उन्होंने बघेल को गुजरात मॉडल देखने की भी सलाह दी। गुजरात मॉडल बनाम छत्तीसगढ़ मॉडल गजेंद्र यादव ने कहा- “गुजरात ने हर क्षेत्र में काम किया है, नहर, शिक्षा, रेवेन्यू… अगर कोई मॉडल अच्छा है तो उसे स्वीकार करना चाहिए।” त्योहारों की राजनीति पर भी तंज भूपेश बघेल ने सरकार द्वारा 1 मई से मनाए जा रहे “सुशासन तिहार” और पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा- त्यौहारों के अवसर पर हरेली में गेड़ी चढ़ते हैं, पोरा में खेलते हैं, दीपावली-होली मनाया जाता हैं… लेकिन इस “सुशासन त्यौहार” के नाम पर असल काम क्या कर रहे हैं? यह त्योहारों का राजनीतिक उपयोग है, सम्मान नहीं। बोरे बासी: परंपरा या राजनीति? भूपेश बघेल ने ‘बोरे बासी’ को छत्तीसगढ़ की संस्कृति और मजदूर-किसान की पहचान बताते हुए इसे “गर्मी में अमृत” कहा। उन्होंने याद दिलाया कि उनकी सरकार ने इसे “बोरे बासी दिवस” के रूप में पहचान दिलाई थी। बोरे बासी पर मंत्री का बयान गजेंद्र यादव ने बोरे बासी’ को लेकर कहा- “मजदूर बोरे बासी कब खाता था जब उसके पास संसाधन नहीं होता था। लोगों के पास पहले बहुत अभाव हुआ करता था। अभाव में रात के बचे हुए चावल को डूबा देते और सुबह भोजन बनाने की मेहनत से बचने के लिए सुबह बोरे बासी खाकर काम करने के लिए जाते थे। अब इसको आप श्रमिकों के सम्मान के रूप में देखें या उस पर राजनीति करें। क्योंकि 25 साल पुराने चीज को अब लाकर के आप उनका सम्मान कर रहे हैं ऐसा बोलना बिल्कुल गलत बात है।” उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि “बोरे बासी उत्सव” में 8 करोड़ रुपए खर्च कर राजनीतिक लाभ लिया गया, जबकि वही पैसा सीधे मजदूरों को दिया जा सकता था। योजनाओं पर सीधी टक्कर मंत्री यादव ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए दावा किया कि ढाई साल में 26 लाख लोगों को आवास, 21 क्विंटल धान 3100 रुपए में खरीदी, एकमुश्त भुगतान, महतारी वंदन योजना और श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने 5 साल में मजदूरों के लिए कोई ठोस योजना नहीं दी। चुनावी बयानबाजी भी तेज मंत्री यादव ने पश्चिम बंगाल चुनावों का जिक्र करते हुए 4 मई के परिणाम में भाजपा की जीत का दावा किया और विपक्ष पर डर और हिंसा की राजनीति करने का आरोप लगाया। तो वही पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने पांच राज्यों में कांग्रेस की स्थिति को लेकर कहा कि – हम लोग अधिकांश राज्यों में खासकर केरल तो हम जीत ही रहे हैं तमिलनाडु में, पांडिचेरी में, असम हम बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
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