![]()
जिले के बोडला तहसील क्षेत्र में भूमि अभिलेखों में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। ग्राम बरभावर (प.ह.नं. 36, रा.नि.मं. राजानवागांव) स्थित खसरा नंबर 29/7 (0.607 हेक्टेयर) में दर्ज भूमिस्वामी के नाम में अचानक परिवर्तन होने से विभागीय लापरवाही व गड़बड़ी देखी जा रही है। जानकारी के अनुसार उक्त भूमि पहले श्यामलाल पिता दुकालू गोंड के नाम दर्ज थी। उनकी मृत्यु के बाद 6 जून 2025 के नामांतरण आदेश के तहत वारिसान भागीरथी सहित 11 लोगों के नाम दर्ज किए गए थे। सितंबर 2025 में डाउनलोड खसरा सूची में भी यही नाम दर्ज था, लेकिन बाद में गिरदावरी रिपोर्ट में अचानक तीजनबाई पति सदाराम, निवासी ग्राम रौचन का नाम भूमिस्वामी के रूप में दर्ज पाया गया। हल्का पटवारी ने 14 अक्टूबर 2025 को इस परिवर्तन की जानकारी पटवारी संघ के माध्यम से तत्कालीन तहसीलदार को दी, जिसके बाद 15 अक्टूबर 2025 को कलेक्टर (भू-अभिलेख शाखा) को भी सूचना भेजी गई। इसके बावजूद करीब छह माह बाद इसी मामले में पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मिलीभगत की आशंका: मामले में पटवारी संघ का सीधा आरेाप है कि बिना किसी वैध आदेश के भुइयां सॉफ्टवेयर में नाम परिवर्तन कैसे संभव हुआ। पटवारी स्तर पर ऐसे परिवर्तन का विकल्प नहीं होने की बात कही जा रही है। यह बदलाव केवल सर्वर स्तर (एनआईसी एक्सेस) से ही संभव हो सकता है, जिससे बाहरी हस्तक्षेप या मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। इसी तरह के अन्य मामलों में ग्राम रौचन के खसरा नंबर 73/1 और शासकीय भूमि खसरा 40/1 में भी नाम और क्षेत्रफल में बदलाव सामने आने की बात कही जा रही है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। पटवारी संघ ने सौंपा ज्ञापन: मामले को लेकर पटवारी संघ ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। संघ का कहना है कि बिना आदेश के अभिलेखों में बदलाव संभव नहीं है, इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही जिले में इस तरह के अन्य मामलों की भी जांच कर पारदर्शिता की मांग की गई है।
<
