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पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर ने प्रदेश में बढ़ रहे न्यायालय अवमानना (कंटेम्प्ट) मामलों पर चिंता जताई है। उन्होंने राज्यपाल को पत्र लिखकर कोर्ट के आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है। 22 जून 2026 को लिखे गए पत्र में मोहम्मद अकबर ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में समय-समय पर न्यायालय की अवमानना के अनेक मामले सामने आ रहे हैं। यह स्थिति न केवल न्यायालयों के आदेशों के पालन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि संविधान और विधि शासन की मूल भावना को भी प्रभावित करती है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में साल 2021 में 1010, साल 2022 में 1279, साल 2023 में 1185, साल 2024 में 1504, साल 2025 में 1884 और साल 2026 में अब तक 744 अवमानना केस दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि साल 2024 से प्रदेश में भाजपा सरकार है और इसी अवधि में अवमानना मामलों में वृद्धि देखने को मिली है। प्रशासनिक जवाबदेही पर उठाए सवाल पूर्व मंत्री ने कहा कि बार-बार अवमानना की कार्रवाई होना इस बात का संकेत है कि कुछ मामलों में न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन के लिए पर्याप्त प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। सुधार के लिए दिए सुझाव पत्र में उन्होंने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं को न्यायालय के आदेशों के पालन के प्रति अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनाया जाए। साथ ही न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा, जवाबदेही तय करने की व्यवस्था और आवश्यक प्रशिक्षण की पहल की जाए, ताकि भविष्य में अवमानना के मामलों में कमी लाई जा सके। राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग मोहम्मद अकबर ने राज्यपाल से इस पर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित कर न्यायालयीन आदेशों के प्रभावी अनुपालन और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उचित कार्रवाई कराने का आग्रह किया है।
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