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पेंड्रारोड न्यायालय ने भाजपा मंडल महामंत्री हेमराज सिंह राठौर को कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ फेसबुक पर अभद्र टिप्पणी और आपत्तिजनक फोटो पोस्ट करने के मामले में दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें ससम्मान बरी किया है। यह मामला साल 2020 का है। जमील अहमद ने शिकायत दर्ज कराई थी कि हेमराज सिंह राठौर ने अपनी फेसबुक आईडी से सोनिया गांधी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली कूटरचित तस्वीरें साझा की थीं। इस शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153, 504 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को पुख्ता तरीके से साबित करने में विफल रहा। साक्ष्यों में तकनीकी खामियां अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश सबूतों में कई तकनीकी खामियां थीं। जिस फेसबुक पोस्ट को आधार बनाकर मामला दर्ज किया गया था, उसका स्क्रीनशॉट साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत प्रमाणित नहीं कराया गया था। फॉरेंसिक जांच और रिपोर्ट की कमी इसके अलावा पुलिस ने न तो शिकायतकर्ता का मोबाइल जब्त कर उसकी फॉरेंसिक जांच कराई और न ही साइबर सेल की कोई पुख्ता रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। जबकि आरोपी का मोबाइल उसी समय जब्त किया गया था। अदालत ने यह भी पाया कि जांच अधिकारी ने न्यायालय की ओर से बार-बार समन और वारंट जारी किए जाने के बावजूद उचित साक्ष्य पेश करने में तत्परता नहीं दिखाई। संदेह का लाभ देकर बरी मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि केवल मौखिक गवाही के आधार पर किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब मामला इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़ा हो। कानून के स्थापित सिद्धांत ‘संदेह का लाभ’ (Benefit of Doubt) देते हुए न्यायालय ने हेमराज सिंह राठौर को सभी आरोपों से बरी कर दिया और उनके पूर्व में निष्पादित जमानत मुचलों को भी भारमुक्त करने का आदेश जारी किया।
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