भीषण गर्मी के बीच रायपुर लोको पायलटों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है। …और पढ़ें

HighLights
- 55 डिग्री तक पहुंचता केबिन तापमान
- पायलटों को हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा
- HHP इंजनों में एसी काम अभी बाकी
भिलाई शेड में बेहतर प्रगति
रेलवे के अनुसार, भिलाई इलेक्ट्रिक लोको शेड (ELS) में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। यहां कुल 400 लोकोमोटिव्स में से 367 इंजनों में एसी लगाया जा चुका है। केवल 33 इंजनों में यह कार्य शेष है, जिसे जल्द पूरा करने का दावा किया जा रहा है। इससे भिलाई शेड में लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
रायपुर शेड की चिंताजनक स्थिति
इसके विपरीत रायपुर डीजल लोको शेड की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां परिचालित 209 इलेक्ट्रिक लोको में से केवल 77 इंजनों में ही अब तक एसी लगाया जा सका है। यानी 60 प्रतिशत से अधिक इंजन अब भी बिना एसी के चल रहे हैं। लोको पायलटों का दावा है कि स्थिति और भी खराब है। उनके अनुसार करीब 410 इंजनों में से केवल 140 में ही एसी काम कर रहा है, जबकि 270 इंजनों में एसी नहीं है और 90 इंजनों में लगे एसी भी खराब पड़े हैं।
माल ढुलाई इंजनों की हालत और खराब
रायपुर शेड में भारी माल ढुलाई के लिए उपयोग किए जाने वाले 75 हाई हार्सपावर (एचएचपी) इंजनों की स्थिति और भी गंभीर है। इन इंजनों में अब तक एसी लगाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में भीषण गर्मी के दौरान इन इंजनों का संचालन पायलटों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
55 डिग्री तापमान में काम करने की मजबूरी
सूत्रों के अनुसार, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में चलने वाली 70 से 80 प्रतिशत ट्रेनों में डब्ल्यूएजी-9 इंजन लगे हैं। संचालन के दौरान ये इंजन अत्यधिक गर्म हो जाते हैं और केबिन का तापमान 55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में 10 से 12 घंटे की ड्यूटी के दौरान पायलटों को थकान, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अधिक गर्मी से एकाग्रता प्रभावित होती है, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ सकती है।
आधुनिकीकरण पर उठ रहे सवाल
आंकड़ों के अनुसार रायपुर शेड में एसी लगाने की रफ्तार बेहद धीमी है। 209 में से केवल 77 इंजनों में एसी होने से स्पष्ट है कि अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। वहीं एचएचपी इंजनों में यह सुविधा अब तक सिर्फ योजनाओं तक सीमित है।
इलेक्ट्रिक लोको शेड भिलाई के 400 लोकोमोटिव्स में से 367 इंजनों में एसी लगाए जा चुके हैं। 33 इंजनों में लगाने का काम बचा है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। इंजनों के वातानुकूलन का कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य पायलटों को बेहतर कार्य वातावरण प्रदान करना है, ताकि रेल परिचालन की सुरक्षा और दक्षता बनी रहे।
-अवधेश कुमार त्रिवेदी, सीनियर डीसीएम, रेल मंडल रायपुर
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