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धमतरी जिले के भटगांव में अब अत्याधुनिक बकरी पालन एवं अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसे ‘रिसर्च कम इंटीग्रेटेड प्रोडक्शन एडवांसमेंट ब्रीडिंग सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना जिले की पशुपालन आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई पहचान देने की तैयारी में है। यह केंद्र सिर्फ बकरी पालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण युवाओं, महिला समूहों और पशुपालकों के लिए रोजगार, प्रशिक्षण और स्वरोजगार का बड़ा केंद्र बनेगा। यहां वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन, उन्नत नस्ल विकास और आधुनिक पशुपालन तकनीकों पर काम होगा। कलेक्टर ने किया स्थल निरीक्षण अविनाश मिश्रा ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों और माणिकस्तु के प्रतिनिधियों के साथ परियोजना पर विस्तृत चर्चा हुई। कलेक्टर ने कहा कि बकरी पालन छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने अधिकारियों को जल्द कार्ययोजना तैयार कर परियोजना शुरू करने के निर्देश दिए। AI लैब से लेकर रिसर्च सेंटर तक होगी सुविधा भटगांव में बनने वाले इस केंद्र में उन्नत नस्ल की बकरियों के संरक्षण, प्रजनन और अनुसंधान के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां कृत्रिम गर्भाधान (AI), रोग निदान, पैथोलॉजी जांच और पशु चिकित्सा सेवाओं के लिए अत्याधुनिक लैब भी बनाई जाएगी। पशु सखियों और युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण परियोजना के तहत पशु सखियों, ग्रामीण युवाओं और पशुधन कार्यकर्ताओं के लिए हॉस्टल-सह-प्रशिक्षण केंद्र भी बनाया जाएगा। यहां ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से वैज्ञानिक पशुपालन, उद्यमिता विकास और क्षमता संवर्धन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ‘फोडर कैफेटेरिया’ बनेगा आकर्षण का केंद्र इस परियोजना की खास पहल ‘फोडर कैफेटेरिया’ होगी। यहां अलग-अलग प्रकार के हरे चारे और टिकाऊ पशु आहार पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा, ताकि पशुओं के पोषण स्तर और उत्पादकता में सुधार हो सके। किसानों को मिलेगा सीधा बाजार किसानों और पशुपालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए पारदर्शी किसान बाजार प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जाएगा। यहां उन्नत नस्ल की बकरियों की खरीद-बिक्री तय और उचित मूल्य पर हो सकेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी। शुरुआती दौर में 12 युवाओं को रोजगार प्रारंभिक चरण में इस परियोजना से 10 से 12 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं जिले के सैकड़ों पशुपालकों को तकनीकी मार्गदर्शन, बेहतर नस्ल, पशु चिकित्सा सहायता और बाजार सुविधा का लाभ मिलेगा। आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि यह हाईटेक बकरी पालन केंद्र भविष्य में आत्मनिर्भर ग्रामीण विकास का मॉडल बन सकता है। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि गांवों में रोजगार और आधुनिक पशुपालन को भी नई दिशा मिलेगी।
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