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राजनांदगांव जिले के सोमनी थाने में एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर गर्भवती बताकर रातभर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। इस मामले में सोमनी थाना प्रभारी (टीआई) और एक महिला हवलदार को निलंबित कर दिया गया है। यह घटना सोमनी क्षेत्र की है, जहां एक बीमार 14 वर्षीय बच्ची को इलाज के लिए सोमनी अस्पताल ले जाया गया था। वहां स्थानीय स्तर पर खरीदी गई किट से की गई जांच में उसे गर्भवती बताया गया। इस गलत रिपोर्ट के आधार पर सोमनी थाना पुलिस ने नाबालिग को रातभर थाने में रोककर पूछताछ की। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बच्ची को भूखा रखा। एक महिला पुलिसकर्मी ने उसका गला दबाया, मारपीट की और चेहरा भी नोच डाला। पुलिस लगातार उस पर संबंध बनाने वाले का नाम बताने का दबाव बनाती रही। अगली सुबह जब बच्ची की सोनोग्राफी कराई गई, तो रिपोर्ट नेगेटिव आई, जिससे सच्चाई सामने आई। इस खुलासे के बाद गांव में आक्रोश फैल गया और बच्ची व उसका परिवार गहरे सदमे में है। मामले में टीआई और महिला हवलदार सस्पेंड मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी अंकिता शर्मा ने त्वरित कार्रवाई की। सोमनी थाना प्रभारी (टीआई) अमन नामदेव और महिला हवलदार राजश्री सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच डीएसपी केपी मरकाम को सौंपी गई है। उन्हें 7 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी है। अस्पताल की ‘जांच किट’ की गुणवत्ता पर उठे सवाल अस्पताल की जांच किट की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ गए हैं। मामला तब सामने आया जब एक गलत रिपोर्ट में एक बीमार बच्ची को गर्भवती बता दिया गया, जबकि असल में ऐसा नहीं था। बताया जा रहा है कि यह किट जीवन दीप समिति के जरिए स्थानीय स्तर पर बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) द्वारा खरीदी गई थी, जिस पर अब जांच की जा रही है। लैब भेजी गई किट सीएमएचओ डॉ. नेतराम नवरत्न ने शनिवार को इस मामले को गंभीर मानते हुए किट की गुणवत्ता जांच के आदेश दिए हैं। ड्रग विभाग के जरिए किट के सैंपल को फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि एक ही किट से अलग-अलग जांचों में पॉजिटिव रिपोर्ट कैसे आई, जबकि जिला अस्पताल की सोनोग्राफी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। पीड़ित परिवार की मांग इधर, पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई से बच्ची मानसिक रूप से परेशान हो गई है। परिजनों और ग्रामीणों ने बैठक कर यह फैसला लिया है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। वहीं, छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और जांच शुरू कर दी है। आयोग की टीम जल्द ही सोमनी थाना और पीड़ित बच्ची से मिलने राजनांदगांव जा सकती है। साथ ही पुलिस विभाग से पूरे मामले की जानकारी भी मांगी गई है।
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