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बीजापुर के उसूर विकासखंड का तर्रेम गांव, जो कभी माओवादी प्रभाव के कारण एक अतिसंवेदनशील और पिछड़ा क्षेत्र माना जाता था, अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मिसाल बनकर उभरा है। जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव ने राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता की पहचान हासिल करते हुए नया इतिहास रचा है। राज्य सरकार की पहल और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार संभव हुआ है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर तर्रेम में प्रतिदिन 25 से 30 मरीजों की ओपीडी संचालित हो रही है। इसके साथ ही सुरक्षित प्रसव, लैब जांच और एम्बुलेंस सेवाएं (102 व 108) भी नियमित रूप से उपलब्ध हैं, जिससे ग्रामीणों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है। यहां स्वच्छता, बेहतर प्रबंधन और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार के साथ-साथ आयुष्मान भारत सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन देखने को मिल रहा है। यह केंद्र कलेक्टर संबित मिश्रा के मार्गदर्शन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीआर पुजारी के नेतृत्व में संचालित हो रहा है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन से मिली पहचान तर्रेम स्वास्थ्य केंद्र ने राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन हासिल किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 16 फरवरी 2026 से किए गए वर्चुअल मूल्यांकन में, 12 मापदंडों के आधार पर इस केंद्र को 88.19 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। मूल्यांकन के दौरान स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ—सीएचओ, आरएचओ, एएनएम और अन्य कर्मियों से राष्ट्रीय कार्यक्रमों और ग्रामीणों को दी जा रही सेवाओं की विस्तृत जानकारी ली गई, जिसमें सभी सफल रहे। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि में जिला कार्यक्रम प्रबंधक वरुण साहू, नर्सिंग ऑफिसर मानसी ताटपल्ली, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमेश ठाकुर, सेक्टर प्रभारी डॉ. शिवा गौरी, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक श्रवण नेताम, डाटा प्रबंधक निरंजन भोई सहित समस्त स्वास्थ्य अमले और मितानिनों की अहम भूमिका रही है।
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