रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और यात्रियों की सुरक्षा संकट में डालने के दो अलग-अलग मामलों में बिलासपुर की विशेष रेलवे अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। …और पढ़ें

HighLights
- जल्दबाजी में हाइवा ने मालगाड़ी को किया डिरेल।
- पेट्रोल बचाने के चक्कर में ट्रेन से टकराई बाइक।
- दोनों ही मामलों में आरोपियों ने स्वेच्छा से कबूला जुर्म।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: रेलवे ट्रैक और समपार फाटक पर लापरवाही बरतने वाले दो अलग-अलग वाहन चालकों को बिलासपुर की विशेष रेलवे अदालत ने दोषी करार दिया है। विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट शंकर कश्यप की अदालत ने दोनों मामलों में आरोपियों के प्रथम अपराध और स्वेच्छा से जुर्म कबूलने के आधार पर सजा व हर्जाने का फैसला सुनाया है।
पहला मामला:
पेट्रोल बचाने के चक्कर में ट्रेन से टकराई बाइक
गौरेला निवासी रामसिंह विश्वकर्मा उम्र 21 वर्ष ने दिसंबर 2020 में कुछ रुपयों का पेट्रोल बचाने के लालच में मुख्य मार्ग छोड़कर खोडरी-सारबहरा के बीच रेलवे ट्रैक से शॉर्टकट मारने की कोशिश की। इस दौरान उसकी बाइक का चक्का पटरियों में फंस गया। सामने से अमरकंटक एक्सप्रेस को आते देख युवक गाड़ी छोड़कर भाग गया। ट्रेन का इंजन बाइक को घसीटते हुए ले गया, जिससे रेल संपत्ति क्षतिग्रस्त हुई। कोर्ट ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश और सुरक्षा संकट में डालने के आरोप में युवक को जेल में बिताई गई 6 दिनों की अवधि की सजा सुनाई। साथ ही, रेल प्रशासन को हुए नुकसान के एवज में 4,000 का हर्जाना और 1,000 का अर्थदंड लगाया।
दूसरा मामला:
जल्दबाजी में हाइवा ने मालगाड़ी को किया डिरेल
16 मार्च 2025 को रतनपुर निवासी हाइवा चालक दीपसागर (23 वर्ष) ने दीपका माइनिंग साइडिंग के समपार फाटक पर घोर लापरवाही दिखाई। उसने जल्दबाजी में जबरन फाटक पार करने का प्रयास किया, जिससे उसका हाइवा बैक हो रही मालगाड़ी के गार्ड ब्रेकवान से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ब्रेकवान पटरी से उतर गया और परिचालन ठप हो गया। हादसे के बाद फरार चालक ने पांच दिन बाद आरपीएफ कोरबा के सामने आत्मसमर्पण किया। अदालत ने रेल अधिनियम की धारा 153 के तहत आरोपी को ””न्यायालय उठने तक”” की सजा सुनाई। इसके साथ ही बीएनएसएस के तहत त रेल प्रशासन को हुए नुकसान के मुआवजे के रूप में ₹10,000 का हर्जाना भरने का आदेश दिया।
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