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Home » लकीर के फकीर न बनें विवेचक; तकनीकी चूक से बच रहे अपराधी
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लकीर के फकीर न बनें विवेचक; तकनीकी चूक से बच रहे अपराधी

By adminMay 21, 2026No Comments3 Mins Read
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20 05 2026 igbsp 1 2026520 124247
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नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: संगीन अपराधों, खासकर एनडीपीएस, पाक्सो एक्ट और सेशन ट्रायल के मामलों में अक्सर विवेचना की छोटी-छोटी तकनीकी खामियों की वजह से आरोपित कोर्ट से बरी हो जाते हैं। उन्हें सख्त सजा दिलाने और विवेचना की इन त्रुटियों को दूर करने के लिए मंगलवार को बिलासपुर के चेतना हाल में एक दिवसीय रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

आइजी रामगोपाल गर्ग के निर्देशन और एसएसपी रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण में रेंज के सभी जिलों के राजपत्रित अधिकारी, थाना/चौकी प्रभारी और विवेचक वर्चुअली और फिजिकल मोड में शामिल हुए। कार्यक्रम में हाई कोर्ट के उप महाधिवक्ता, एनडीपीएस के विशेष न्यायाधीश, लोक अभियोजक और विधिक विशेषज्ञों ने पुलिस अधिकारियों को केस डायरी मजबूत बनाने के टिप्स दिए। आइजी रामगोपाल गर्ग ने पुलिसिंग में विवेचना की महत्ता रेखांकित करते हुए कहा कि अक्सर देखा गया है कि विवेचक प्रिंटेड फार्म में लकीर के फकीर बनकर कागजी कार्रवाई पूरी कर देते हैं। कोर्ट में गवाहों या पीड़ितों का मुकर जाना, गवाहों को समय पर कोर्ट में पेश न कर पाना और तकनीकी साक्ष्यों की कमी ही आरोपितों की दोषमुक्ति का मुख्य कारण बनती है। विवेचक पूरी गंभीरता से केस डायरी तैयार करें।

एनडीपीएस केस में सैंपलिंग और चेन आफ कस्टडी सबसे अहम: एसएसपी

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए एसएसपी रजनेश सिंह ने इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस के मामलों में जब्ती के बाद मादक पदार्थों की सैंपलिंग, घटनास्थल के मालिकाना हक के दस्तावेज जुटाना और मालखाने से लेकर लैब तक चेन आफ कस्टडी को बरकरार रखना सबसे जरूरी है। इसमें जरा सी चूक पूरे केस को कोर्ट में कमजोर कर देती है।

जज और विधिक विशेषज्ञों ने गिनाईं विवेचना की ये बड़ी कमियां

समराइज करें: रेंज स्तरीय पुलिस प्रशिक्षण में न्यायिक और विधिक विशेषज्ञों ने विवेचना की तकनीकी कमियों को सुधारने के टिप्स दिए। विशेष न्यायाधीश अगम कुमार कश्यप ने क्रमबद्ध कार्रवाई न होने, सीडीआर सत्यापन की कमी और एनालिटिकल मैप रिपोर्ट पेश न करने को पुलिस की बड़ी चूक बताया। डीडीपी ए.के. झा ने ‘इन्वेस्टिगेशन चेकलिस्ट’ और लोक अभियोजक दाऊ चंद्रवंशी ने सेशन ट्रायल में साक्ष्यों के मिलान पर जोर दिया।

विशेष लोक अभियोजकों (सूर्यकांत शर्मा, संजय नामदेव, अनामिका मिश्रा, मनीषा नंदी) ने एनडीपीएस की धाराओं (42, 50, 57) के पालन, तय समयसीमा में रिपोर्ट भेजने, पाक्सो एक्ट में संवेदनशीलता और त्वरित मेडिकल साक्ष्य जोड़ने की बात कही। वहीं, ज्योति लता मानिकपुरी और श्वेता कुर्रे ने जेजेबी की बारीकियों तथा नवीन कानूनों पर पुलिसकर्मियों की शंकाओं का समाधान किया।

क्वालिटी इन्वेस्टिगेशन से ही मिलेगी सजा: उप महाधिवक्ता

उच्च न्यायालय के उप महाधिवक्ता डा. सौरभ कुमार पाण्डेय ने समापन सत्र में विवेचना के स्तर को बेहतर बनाने के गुरु सिखाए। उन्होंने कहा कि पुलिस को अब पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलकर डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर फोकस करना होगा, ताकि कोर्ट में केस पूरी मजबूती से टिक सके।

विवेचना को मजबूत बनाएंगे ये आधुनिक हथियार

विशेषज्ञों ने बताया कि अब विवेचकों को केस मजबूत करने के लिए इन संसाधनों का अनिवार्य रूप से उपयोग करना होगा:

1. अनिवार्य वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी।

2. घटनास्थल पर ही इन्वेस्टिगेशन व फोरेंसिक किट का उपयोग।

3. फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट्स और साइबर टीम की तत्काल मदद।

4. आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से साक्ष्य संकलन।

स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित

कार्यशाला के अंत में बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह द्वारा बेहतर समन्वय और पुलिस अधिकारियों का विधिक ज्ञानवर्धन करने के लिए सभी मुख्य वक्ताओं और विधिक प्रशिक्षकों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।



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