बिलासपुर में गर्मी बढ़ने के साथ आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। …और पढ़ें

HighLights
- शहर में रोजाना औसतन 20 लोग कुत्तों से घायल
- गर्मी बढ़ने से कुत्तों का व्यवहार अधिक आक्रामक हुआ
- शहर में 7500 आवारा कुत्तों की मौजूदगी चिंता बढ़ा रही
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: जिले और शहर में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसकी मुख्य वजह बढ़ती गर्मी को माना जा रहा है। तापमान बढ़ने के साथ कुत्तों का व्यवहार अधिक आक्रामक हो गया है, जिसके चलते डॉग बाइट के मामलों में अचानक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
अप्रैल में 195 लोग बने शिकार
सिम्स से मिले आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के पहले 19 दिनों में ही 195 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं। सभी मामले शहरी क्षेत्र से सामने आए हैं। औसतन हर दिन करीब 20 लोग डॉग बाइट के शिकार हो रहे हैं, जिससे लोगों में डर और चिंता का माहौल है।
पहले कम थे मामले, अब तेजी से बढ़े
जनवरी, फरवरी और मार्च के महीनों में डॉग बाइट के मामले अपेक्षाकृत कम थे। उस समय रोजाना पांच से दस लोगों को ही कुत्ते काट रहे थे, लेकिन अप्रैल में गर्मी बढ़ते ही मामलों में तेजी आई है। तेज धूप और गर्मी के कारण कुत्ते खुले में रहने के चलते ज्यादा परेशान हो रहे हैं, जिससे उनके व्यवहार में आक्रामकता आ रही है।
इन इलाकों में ज्यादा खतरा
शहर के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां कुत्तों के झुंड अधिक सक्रिय हैं और डॉग बाइट की घटनाएं ज्यादा सामने आ रही हैं।
- सिटी कोतवाली के सामने
- करबला रोड से पुराना बस स्टैंड चौक
- इमलीपारा रोड
- पुलिस लाइन रोड
- बृहस्पति बाजार
- कुदुदंड, सरकंडा, गोंड़पारा, कतियापारा
- श्रीकांत वर्मा मार्ग
एंटी रैबीज इंजेक्शन का पर्याप्त स्टॉक
राहत की बात यह है कि सिम्स और जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। इससे पीड़ितों को समय पर उपचार मिल रहा है। हालांकि, यदि कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
गर्मी में बदलता है कुत्तों का व्यवहार
विशेषज्ञों के अनुसार, कुत्तों को ठंडा वातावरण पसंद होता है। अधिक गर्मी उन्हें असहज बना देती है, जिससे वे चिड़चिड़े और आक्रामक हो जाते हैं। ऐसे में जब उनका सामना लोगों से होता है, तो वे हमला कर देते हैं।
शहर में 7500 कुत्ते, नियंत्रण में चुनौती
नगर निगम द्वारा समय-समय पर कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी कराने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसका अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है। कुछ दिनों बाद कुत्ते फिर उसी इलाके में लौट आते हैं। निगम के अनुसार वर्तमान में शहर में करीब 7500 आवारा कुत्ते हैं, जिससे स्थिति नियंत्रण में लाना चुनौतीपूर्ण बन गया है।
प्रतिदिन 15 से 20 लोग डॉग बाइट के शिकार होकर अस्पताल में रैबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचे रहे हैं। समय पर सभी पीड़ित को इंजेक्शन लगाया जा रहा है। कुत्तो की संख्या को नियंत्रण में लाना जरूरी हो गया है। वैसे भी गर्मी के दिनों में कुत्ते उग्र रूप धारण कर लेते हैं। इसकी वजह से भी डाग बाइट के मामले बढ़ जाते हैं।
-डॉ लखन सिंह, एमएस, सिम्स
<
