छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में पुलिस की एक बड़ी प्रशासनिक और कानूनी चूक सामने आई है। …और पढ़ें

HighLights
- चिंचगरांवपारा में धारदार छुरा लहराने का मामला।
- हथियार को मालखाने में सीलबंद तक नहीं किया।
- विवेचक ने खुद ही शिकायतकर्ता बनकर कर दी जांच।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: थाना सरकंडा क्षेत्र के चिंचगरांवपारा स्कूल चौक पर अवैध रूप से धारदार हथियार लहराने के मामले में पुलिस कोर्ट में छुरा पेश नहीं कर पाई। साथ ही पुलिस के गवाह मुकर गए और विवेचक ने खुद शिकायत कर्ता बनकर जांच की थी। कोर्ट ने आरोपित को बरी कर दिया है।
अभियोजन के अनुसार, 15 सितंबर 2024 की दोपहर पुलिस ने आरोपित भोजराम साहू उर्फ भोजू उम्र 23 वर्ष को 14 इंच लंबा लोहे का धारदार छुरा लहराकर लोगों को डराते हुए गिरफ्तार करने का दावा किया था। इसके बाद आरोपित कुल 8 महीने तक इस मामले में जेल में रहा।
दोषमुक्ति के मुख्य आधार व कोर्ट के तर्क
मुख्य सबूत गायब: पुलिस जब्तशुदा छुरपे को न तो मालखाने में सीलबंद कर सकी और न ही कोर्ट में साक्ष्य के दौरान आर्टिकल के रूप में पेश किया। कोर्ट ने माना कि बिना सीलबंद हथियार के छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
गवाह मुकरे: जब्ती के स्वतंत्र गवाह कोर्ट में मुकर गए। एक गवाह ने सिर्फ शराब पीकर गाली-गलौज की बात कही, तो दूसरे ने थाने में खाली कागजों पर दस्तखत कराने का आरोप लगाया।
विवेचक ही फरियादी: कोर्ट ने नोट किया कि जांच अधिकारी एन.ए. ठाकुर ने खुद ही शिकायत दर्ज की और खुद ही जांच की। मामले में कोई स्वतंत्र गवाह या रोजनामचा सन्हा भी पेश नहीं किया गया।
कोर्ट ने यह आदेश जारी किया
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सिद्धी व्होरा की अदालत ने आर्म्स एक्ट के मामले में जब्त हथियार को मूल्यहीन मानकर नष्ट करने का आदेश दिया है। कोर्ट में आरोप सिद्ध नही होने पर आरोपित को बरी करने का आदेश जारी किया गया।
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