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बिलासपुर में पेट्रोल-डीजल संकट और सप्लाई को लेकर मची अफरातफरी के बीच जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। पिछले कुछ दिनों में डीजल की असामान्य खपत और बिक्री को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने चार पेट्रोल पंप संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ पेट्रोल पंपों पर पिछले साल की औसत मासिक खपत की तुलना में 100 से 337 प्रतिशत तक अधिक डीजल की मांग और बिक्री दर्ज की गई है। प्रशासन को आशंका है कि इस अतिरिक्त डीजल की सप्लाई का उपयोग औद्योगिक इकाइयों में अवैध रूप से किया जा रहा है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर औद्योगिक डीजल पर भी देखने को मिल रहा है। पेट्रोलियम क्षेत्र के जानकारों के अनुसार वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। इसी वजह से औद्योगिक उपयोग के लिए मिलने वाले बल्क डीजल के दामों में भारी वृद्धि की गई है। डीजल मांग पर बढ़ा दबाव वर्तमान में उद्योगों को मिलने वाला बल्क डीजल लगभग 153 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि पेट्रोल पंपों पर रिटेल डीजल में तीन रुपये की बढ़ोतरी के बाद यह 97.25 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। दोनों कीमतों के बीच 60 रुपए से अधिक का अंतर है। इसी अंतर के कारण अधिकांश औद्योगिक इकाइयाँ तेल कंपनियों से सीधे बल्क डीजल लेने के बजाय पेट्रोल पंपों से ही डीजल खरीद रही हैं। इसी वजह से जिले में डीजल की मांग और सप्लाई पर अचानक दबाव बढ़ गया है। औद्योगिक ईकाइयों को डीजल सप्लाई करने की आशंका इसके कारण बल्क और रिटेल डीजल की कीमतों के बीच बढ़ते अंतर ने बाजार में असंतुलन की स्थिति पैदा कर दी है। उद्योगों की बढ़ती मांग के कारण डीलर पंपों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, जिसकी वजह से डीजल की डिमांड बढ़ने की आशंका जताई गई है। खाद्य शाखा की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर जारी नोटिस में कहा गया है कि औद्योगिक डीजल की कीमतों में वृद्धि के बाद जिले के कुछ पंपों में अचानक डीजल की मांग बढ़ गई, जबकि अन्य कंज्यूमर पंपों में मांग कम हो गई। डीजल की खपत बढ़ने पर कलेक्टर ने दिखाई सख्ती समीक्षा बैठक में डीजल खपत को लेकर उठे सवालों के बीच कलेक्टर संजय अग्रवाल ने खाद्य विभाग के अधिकारियों से जानकारी जुटाई, जिसमें पता चला है कि जिले के चार पेट्रोल पंप में डीजल की खपत अचानक बढ़ी है। ऐसे सर्विस स्टेशनों को चिन्हित कर कलेक्टर ने नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्हें तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। इन पेट्रोल पंपों को जारी हुआ नोटिस तीन दिन में मांगा जवाब खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर ने बताया कि, नोटिस में सभी संचालकों को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने पूछा है कि आखिर इतनी अधिक मात्रा में डीजल की बिक्री कैसे हुई और किन उपभोक्ताओं को आपूर्ति की गई। पहले भी दिए गए थे निर्देश खाद्य शाखा ने नोटिस में यह भी उल्लेख किया है कि पहले ही सभी पेट्रोल पंप संचालकों को भंडारण यंत्रों में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति नहीं करने और पंप परिसर में सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद खपत में भारी अंतर सामने आने पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
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