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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर बड़ी लापरवाही सामने आई है। स्टेशन के VIP गेट नंबर-2 के बाहर लगाया गया विशाल तिरंगा झंडा फटा हुआ और मैली हालत में लहराता नजर आया, जिसने पूरे मामले को विवाद में ला दिया है। देश की आन-बान और शान माने जाने वाले तिरंगे की यह स्थिति राष्ट्र का अपमान है। स्टेशन परिसर में लगा यह तिरंगा आमतौर पर गौरव और सम्मान का प्रतीक माना जाता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह बदहाल दिख रहा है। झंडे का कपड़ा फटा हुआ है और उस पर गंदगी भी साफ नजर आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी जिम्मेदारी के बावजूद रेलवे प्रशासन की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी। रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) मुख्यालय के प्रमुख स्टेशन पर हो रही इस तरह की अनदेखी ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां रेलवे “अमृत स्टेशन योजना” जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए आधुनिक सुविधाओं के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय प्रतीकों की ऐसी उपेक्षा बेहद चिंताजनक है। जानिए…क्या कहता है नियम भारतीय ध्वज संहिता के अनुसार, तिरंगे को हमेशा सम्मानजनक और साफ-सुथरी स्थिति में रखा जाना अनिवार्य है। फटा, गंदा या क्षतिग्रस्त झंडा सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना नियमों के खिलाफ माना जाता है। खराब झंडे को दफन या फिर जलाने की है प्रक्रिया भारतीय झंडा संहिता के मुताबिक कटे-फटे या फिर खराब हुए तिरंगे को दफना देना चाहिए, उसे ऐसे ही नहीं फेंकना चाहिए। अगर, कहीं दफनाने की जगह नहीं तो फिर ऐसे में तिरंगे को एकांत में जलाकर नष्ट करना चाहिए। वीडियो बनाकर की जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग रेलवे स्टेशन परिसर में लगाए गए राष्ट्रीय ध्वज का फटे हुए हालत में लहराते हुए स्थानीय लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। साथ ही इस मामले को लेकर आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन देश के प्रतीक का सम्मान नहीं कर सकता, तो उससे बेहतर व्यवस्थाओं की उम्मीद करना भी नहीं करना चाहिए। उन्होंने तत्काल तिरंगे को बदलने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
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