बिलासपुर जोन के 238 रेल इंजन कवच से लैस:2430 किमी लाइनों पर काम जारी, बिलासपुर-चांपा में जल्द टेस्टिंग; दुर्घटनाएं घटेंगी, रफ्तार बढ़ेगी

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बिलासपुर जोन के 238 रेल इंजन ‘कवच’ प्रणाली से लैस किए जा चुके हैं। जोन की 2430 किलोमीटर रेल लाइनों पर इस प्रणाली को स्थापित करने का काम तेजी से जारी है। बिलासपुर से चांपा के बीच 50 किलोमीटर के खंड में कवच की टेस्टिंग जल्द शुरू होगी। जोन के सीपीआरओ शेख शमीउर रहमान ने बताया कि, बिलासपुर से चांपा के 50 किलोमीटर रेलखंड पर ‘कवच’ प्रणाली के एसआईएल-0 (SIL-0) स्तर की कमीशनिंग जल्द की जाएगी। उनके अनुसार, इस प्रणाली के लागू होने से रेल दुर्घटनाओं में कमी आएगी और ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी। जानिए कहां किस श्रेणी के कवच लग रहे अधिकारिक जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर-चांपा खंड में एसआईएल-0 श्रेणी का ‘कवच’ स्थापित किया जा रहा है। वहीं, नागपुर मंडल के नागपुर-दुर्ग खंड पर एसआईएल-4 (SIL-4) कमीशनिंग के लिए साइट परीक्षण और लोको ट्रायल जारी हैं। जोन महाप्रबंधक ने कार्यों का निरीक्षण किया एसआईएल-0 की तुलना में एसआईएल-4 अधिक सक्षम प्रणाली है। हालांकि, इससे भी उन्नत एसआईएल-5 प्रणाली विकसित की जा चुकी है। पिछले 31 जुलाई को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने नागपुर मंडल का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने रेलवे सुरक्षा, परिचालन और स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ की प्रगति का जायजा लिया। इससे पहले, 23 जुलाई को नागपुर रेल मंडल के कलमना-सालवा (25 किलोमीटर) रेलखंड में एसआईएल-4 स्तर के ‘कवच’ का सफल परीक्षण किया गया था। इस परीक्षण में सिग्नल रिस्पॉन्स, स्वचालित ब्रेकिंग, गति नियंत्रण और आपातकालीन (SOS) प्रणाली की जांच की गई। इसी तरह, रायपुर मंडल में दुर्ग-मांढर खंड पर भी ‘कवच’ प्रणाली स्थापित करने का कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है। रेल प्रशासन का कहना है कि भारतीय रेल द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) प्रणाली ‘कवच’ का चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया जा रहा है। रेल दुर्घटनाएं 135 से घट कर 16 हो गई ‘कवच’ प्रणाली के कारण रेल दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आने का दावा किया गया है। भारतीय रेल में परिणामी (Consequential) रेल दुर्घटनाओं की संख्या वर्ष 2014-15 में 135 थी, जो घटकर वर्ष 2024-25 में 31 और वर्ष 2025-26 में मात्र 16 रहने का अनुमान है। क्या है ‘कवच’? ‘कवच’ भारतीय रेल के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित विश्वस्तरीय SIL-4 प्रमाणित स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। यह प्रणाली लोको पायलट को वास्तविक समय में सिग्नल, गति सीमा, लक्ष्य दूरी तथा मूवमेंट अथॉरिटी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराती है। यदि किसी कारणवश लोको पायलट निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करता या खतरे वाले सिग्नल (SPAD) को पार करने की स्थिति बनती है, तो कवच स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को संरक्षित रोक देता है। घने कोहरे जैसी परिस्थितियों में भी यह प्रणाली संरक्षित संचालन सुनिश्चित करती है। कवच कैसे करता है कार्य? कवच प्रणाली ट्रैक पर स्थापित RFID टैग, यूएचएफ रेडियो संचार, स्टेशन इंटरलॉकिंग एवं ऑनबोर्ड उपकरणों के माध्यम से ट्रेन की स्थिति, गति एवं मार्ग की सतत निगरानी करती है। यह संरक्षित दूरी का निरंतर आकलन करते हुए आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाती है तथा संभावित दुर्घटनाओं को टालती है।
खतरा भांप कर रूक जाएगी ट्रेन
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