![]()
शनिवार को सर्व आदिवासी समाज के तत्वावधान में जिले के जामड़ी पाट (तुएगोंदी) में देव जात्रा का आयोजन किया जाएगा। पारंपरिक पूजा व अन्य वजहों से ग्राम तुएगोंदी, केरी जुंगेरा, बड़े जुंगेरा इन तीन गांवों में तनाव का माहौल बना हुआ है। चार साल पहले तुएगोंदी में इसी प्रकार के एक आयोजन के दौरान आदिवासी समाज के कार्यक्रम में पथराव की वारदात हुई थी। लिहाजा प्रशासन की ओर से जामड़ी पाट से लगे 20 गांवों को संवेदनशील मानकर अलर्ट जारी कर पुलिस बल तैनात किया गया है। शुक्रवार को 500 से ज्यादा जवान तैनात थे। शनिवार को स्थिति तनावपूर्ण हो सकती हैं। इस वजह से 1500 जवानों को बुलाया गया हैं। पाटेश्वर धाम से करीब ढाई किलोमीटर दूर बड़े जुंगेरा गांव के मुख्य चौक के पास बलि दिए जाने की आशंका के बाद शुक्रवार को ग्रामीणों ने चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने अज्ञात लोगों पर बलि देने का आरोप लगाया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। करीब 300 से अधिक पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और अधिकारियों की समझाइश के बाद स्थिति सामान्य हो पाई। हालांकि पाटेश्वर धाम के आसपास स्थित गांवों के ग्रामीण अलग-अलग गुट में बंटे हुए हैं। जलकैना को पाटकर तालाब निर्माण का आरोप, आदिवासी समाज ने जताई नाराजगी
सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष तुकाराम कोर्राम ने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया गया है, वह तुएगोंदी वन क्षेत्र की भूमि है। हालांकि समाज को मंदिर निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है। समाज की आपत्ति जल कैना को लेकर है। जो एक प्राकृतिक जल स्रोत होने के साथ आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र भी है। कोर्राम के अनुसार जल कैना स्थल पर आदिवासी समाज वर्षों से पूजा-अर्चना करता आ रहा है, लेकिन अब इस प्राकृतिक जल स्रोत को पाटकर उसका सीमेंटीकरण किया जा रहा है और उसे नया स्वरूप देने का प्रयास कर प्रकृति और पारंपरिक आस्था के साथ छेड़छाड़ किया जा रहा हैं। जल स्रोत के समीप तालाब निर्माण कराए जाने से समाज में नाराजगी है। यही कारण है कि अपनी प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आदिवासी समाज को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। पाट बाबा प्राकृतिक हैं, मूर्ति स्थापना पर जताई आपत्ति
सर्व आदिवासी समाज के नेता विनोद नागवंशी ने बताया कि आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है और उनके देवी-देवता जंगल, पेड़-पौधे, पहाड़, नदी और झरनों में विद्यमान होते हैं। आदिवासी परंपरा में किसी प्रकार की मूर्ति पूजा का प्रावधान नहीं है, बल्कि प्राकृतिक स्थलों को ही देवस्थल के रूप में पूजा जाता है। जहां समाज अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं का निर्वहन करता है। जामड़ी पाट स्थित पाट बाबा स्थल में एक मूर्ति स्थापित कर दी गई। यह मूर्ति किसकी है, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। इसे लेकर आदिवासी समाज ने आपत्ति जताई है।
<
