Facebook Twitter Youtube
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • न्याय
  • राजनीति
  • साहित्य
  • धर्म-समाज
  • वीडियो
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • न्याय
  • राजनीति
  • साहित्य
  • धर्म-समाज
  • वीडियो
Home » बड़े राज्यों से आगे छत्तीसगढ़… हर साल 38 MBBS सीटें केंद्र को देकर स्टेट कोटे पर बढ़ा दबाव; स्थानीय छात्रों को मिल रहे कम मौके
Breaking News

बड़े राज्यों से आगे छत्तीसगढ़… हर साल 38 MBBS सीटें केंद्र को देकर स्टेट कोटे पर बढ़ा दबाव; स्थानीय छात्रों को मिल रहे कम मौके

By adminMay 13, 2026No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
12 05 2026 chhattisgarh mbbs seats central pool
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email


नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ देश में हर साल सबसे अधिक MBBS सीटें सेंट्रल पूल में देने वाला राज्य बना हुआ है। वर्तमान में प्रदेश से 38 मेडिकल सीटें केंद्र को भेजी जा रही हैं, जो सरकारी मेडिकल सीटों का लगभग तीन फीसदी हिस्सा है। इस व्यवस्था के कारण स्टेट कोटे की सीटें लगातार कम हो रही हैं और इसका सीधा असर प्रदेश के स्थानीय छात्रों पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सेंट्रल पूल में सीटें देना पूरी तरह स्वैच्छिक व्यवस्था है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसे लंबे समय से अनिवार्य परंपरा की तरह लागू किया जा रहा है। यही वजह है कि मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी होने के बावजूद प्रदेश के छात्रों को उसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

बड़े राज्यों से ज्यादा सीटें दे रहा छोटा राज्य

छत्तीसगढ़ 38 सीटें सेंट्रल पूल में दे रहा है, जबकि कई बड़े राज्य इससे कम सीटें उपलब्ध करा रहे हैं। मध्यप्रदेश 28, बिहार 26, दिल्ली 25, राजस्थान और केरल 24-24 सीटें दे रहे हैं। वहीं उत्तरप्रदेश जैसे बड़े राज्य से केवल 21 सीटें ही केंद्र को भेजी जा रही हैं।

राज्य सीटें राज्य सीटें
छत्तीसगढ़ 38 महाराष्ट्र 16
मध्यप्रदेश 28 झारखंड 15
बिहार 26 पं. बंगाल 10
दिल्ली 25 असम 06
राजस्थान 24 उत्तराखंड 04
केरल 24 चंडीगढ़ 03
उत्तरप्रदेश 21 हरियाणा 01

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि जिन राज्यों में मेडिकल कालेज और सीटों की संख्या छत्तीसगढ़ से कहीं अधिक है, वहां भी कम सीटें सेंट्रल पूल में दी जा रही हैं। ऐसे में छोटे राज्य से अधिक सीटें भेजे जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

स्वैच्छिक व्यवस्था बनी स्थायी परंपरा

नेशनल मेडिकल कमीशन के दस्तावेजों के अनुसार सेंट्रल पूल पूरी तरह स्वैच्छिक व्यवस्था है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह अनिवार्य नियम होता तो बड़े राज्यों से अधिक सीटें ली जातीं। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ पिछले लगभग 25 वर्षों से लगातार अपनी करीब तीन फीसदी सीटें केंद्र को देता आ रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि अब मेडिकल शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञ और छात्र संगठन इस व्यवस्था की समीक्षा की मांग उठाने लगे हैं।

नक्सल प्रभावित छात्रों को नहीं मिला अपेक्षित लाभ

सेंट्रल पूल व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सल प्रभावित परिवारों के बच्चों को मेडिकल शिक्षा में अवसर देना था। शुरुआत में उत्तर-पूर्व और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में मेडिकल कालेजों की कमी के कारण वहां के छात्रों को इसका लाभ मिलता था।

अब इन क्षेत्रों में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ चुकी है। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों के छात्रों को इस कोटे का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। जानकारी के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में केवल एक-दो छात्रों को ही इस व्यवस्था के तहत प्रवेश मिल सका है।

नए मेडिकल कालेजों से बढ़ेगा सीटों का नुकसान

सेंट्रल पूल में सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटें दे रहा छत्तीसगढ़, स्थानीय छात्रों के अवसर घटने पर उठे सवाल

प्रदेश में इस वर्ष पांच नए मेडिकल कालेज शुरू होने की संभावना है। यदि प्रत्येक कालेज में 250 सीटें स्वीकृत होती हैं तो करीब आठ सीटें प्रति कालेज सेंट्रल पूल में चली जाएंगी।

इसका मतलब है कि मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ने के बावजूद स्थानीय छात्रों के लिए उपलब्ध सीटें अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ पाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में डॉक्टरों की जरूरत और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए सरकार को इस नीति की गंभीर समीक्षा करनी चाहिए।

सीटों का गणित समझिए

प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों की कुल सीटों का लगभग तीन फीसदी हिस्सा सेंट्रल पूल में भेजा जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी मेडिकल कालेज में 250 सीटें हैं तो करीब आठ सीटें केंद्र को चली जाती हैं। इसी कारण हर साल मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी के साथ सेंट्रल पूल का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है।

वर्तमान में प्रदेश से 38 सीटें केंद्र को दी जा रही हैं, जिससे स्टेट कोटे की सीटें घट रही हैं और स्थानीय छात्रों के लिए मेडिकल प्रवेश की प्रतिस्पर्धा और कठिन होती जा रही है।

डीएमई ने क्या कहा

चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. यूएस पैकरा ने कहा कि प्रदेश से सेंट्रल पूल में तीन फीसदी एमबीबीएस सीटें देने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार सीटें उपलब्ध कराई जा रही हैं।



<



Advertisement Carousel

theblazeenews.com (R.O. No. 13229/12)

×
Popup Image



Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
admin
  • Website

Related Posts

बिलासपुर के ये दो गांव आजादी के बाद से आज तक हैं पहुंच विहीन, हाई कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग के सचिव से मांगा जवाब

May 13, 2026

बिलासपुर नगर निगम उपचुनाव में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, जीत के लिए बनाई रणनीति; प्रत्याशी चयन पर राजनीतिक हलचल तेज

May 13, 2026

उर्स के दौरान उपद्रव में सरगना समेत 7 आरोपी गिरफ्तार

May 13, 2026

Comments are closed.

samvad add RO. Nu. 13783/159
samvad add RO. Nu. 13783/159
Stay In Touch
  • Facebook
  • Twitter
  • YouTube
  • Telegram
Live Cricket Match

[covid-data]

Our Visitor

070183
Views Today : 16
Views Last 7 days : 627
Views Last 30 days : 3346
Total views : 91318
Powered By WPS Visitor Counter
About Us
About Us

Your source for the Daily News in Hindi. News about current affairs, News about current affairs, Trending topics, sports, Entertainments, Lifestyle, India and Indian States.

Our Picks
Language
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
  • Home
© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.