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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में आदिवासी परिवार की पैतृक भूमि के फर्जी नामांतरण और उसे बेचने के प्रयास के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद मरवाही एसडीएम देवेंद्र सिरमौर ने हल्का पटवारी रविन्द्र कश्यप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही मामले के मुख्य आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह कार्रवाई ग्राम सेमरदर्दी निवासी सावन सिंह वाकरे एवं अन्य ग्रामीणों की शिकायत पर की गई जांच के बाद सामने आई है। कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। बिना नोटिस दर्ज कर दी भूमि अविवादित जांच में पता चला कि पटवारी रविन्द्र कश्यप ने संबंधित पक्षों को बिना कोई नोटिस जारी किए और बिना सुनवाई का अवसर दिए विवादित भूमि को ऑनलाइन भुईयां पोर्टल में अविवादित दर्ज कर दिया था। इससे जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ गई। प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही और नियमों का उल्लंघन मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई की है। ग्राम सभा का फर्जी प्रस्ताव तैयार करने का आरोप जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन सरपंच सुखलाल पोर्ते और पंचायत सचिव ज्योति गुप्ता ने बिना किसी भौतिक सत्यापन और वैध वारिसों की जांच के ग्राम सभा का प्रस्ताव तैयार कर दिया था। प्रशासन का कहना है कि इस प्रस्ताव के आधार पर भूमि संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जबकि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। मामले में दोनों के खिलाफ निलंबन और अन्य वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस मामले में निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर तहसीलदार प्रीति शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे निर्धारित समय सीमा में जवाब मांगा गया है। मुख्य आरोपी के खिलाफ एफआईआर के निर्देश प्रशासनिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मुख्य आरोपी महेश साकत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया गया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और प्रक्रियात्मक खामियों का लाभ उठाकर आदिवासी परिवार की जमीन पर कब्जा करने और उसे बेचने की कोशिश की जा रही थी। भू-माफियाओं में मचा हड़कंप कलेक्टर की सख्त कार्रवाई के बाद जिले में भू-माफियाओं और लापरवाह राजस्व अधिकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी भूमि से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
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