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छत्तीसगढ़ में दिल्ली के किसी रेस्टोरेंट जैसी भीषण आग लग जाए, तो राज्य के एक बड़े हिस्से में उसे बुझाना नामुमकिन हो जाएगा। प्रदेश के 6 जिलों और 146 ब्लॉकों में आज भी एक भी फायर स्टेशन नहीं है। इस बदहाली को दूर करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से कुल 147 रुपए करोड़ मिले थे, लेकिन प्रशासनिक लेटलतीफी और आपसी खींचतान के कारण यह भारी-भरकम राशि अब वापस केंद्र को लौटने की कगार पर है। दरअसल, मार्च 2026 में जब वित्तीय वर्ष खत्म होने पर राशि लैप्स होने लगी, तो आपदा विभाग के अनुरोध पर केंद्र ने विशेष परिस्थितियों में इसे ‘के-डिपॉजिट’ में रखने की अनुमति दे दी। केंद्र ने शर्त रखी कि यह राशि हर हाल में 30 जून 2026 तक खर्च हो जानी चाहिए। इसके बाद 8 अप्रैल 2026 को 124 करोड़ रुपए नगर सेना को सौंपे गए। लेकिन जून की शुरुआत तक भी नगर सेना बड़ी दमकल गाड़ियों के लिए मुख्य टेंडर जारी नहीं कर पाई है। कुछ छोटे टेंडर निकाले गए हैं, जो 30 जून तक फाइनल नहीं हो सकेंगे। ऐसे में करीब 150 नई दमकल गाड़ियां आने का रास्ता बंद होना और 124 करोड़ रुपए केंद्र को वापस लौटना तय माना जा रहा है। बता दें कि अभी प्रदेश में कुल 150 दमकल वाहन हैं, उनमें से भी आधे खराब हैं। कैसे लैप्स होने की कगार पहुंची फायर सिस्टम सुधार की राशि केंद्र सरकार ने साल 2023-24 में देश भर में फायर सिस्टम सुधार के लिए 15वें वित्त आयोग के माध्यम से 5,000 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। इसमें 75% हिस्सा केंद्र और 25% राज्य का था। इसके तहत छत्तीसगढ़ को केंद्र से 110 करोड़ रुपए और राज्य से 37 करोड़ रुपए मिलाकर कुल 147 करोड़ रुपए मिले थे। शर्त यह थी कि इस राशि को तीन साल के भीतर नए फायर स्टेशन बनाने, गाड़ियां खरीदने और ट्रेनिंग सेंटर्स को अपग्रेड करने में खर्च करना था। लेकिन तीन साल का सफर सिर्फ फाइलों में बीत गया। 43 लाख कंसल्टेंट को दिए, बेकार गए कलेक्टरों की मांग भी ठुकराई प्रदेश के सभी कलेक्टरों ने जिलों में बदहाल फायर सिस्टम का हवाला देते हुए आपदा विभाग से 210 करोड़ रुपए मांगे थे। सुझाव दिया था कि पिछली सरकार की तरह इस बार भी केंद्रीयकृत खरीदी के बजाय राशि जिलों को आवंटित की जाए, पर विभाग पैसा दबाकर बैठा रहा। इस मामले में विभागीय मंत्री टंकराम वर्मा की कार्यप्रणाली और मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं। 6 जिलों में सेटअप तक नहीं: विधानसभा में सरकार ने माना था कि 27 जिलों में ही फायर स्टेशन हैं। गोरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान, मोहला-मानपुर, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़-मनेंद्रगढ़-चिरमिरी में स्टेशन नहीं है। 124 करोड़ रुपए वित्त विभाग में आए हैं और हमें टेंडर करने को कहा गया है। वेंडर को सीधा भुगतान वित्त विभाग ही करेगा। हमने कुछ छोटे टेंडर निकाले हैं, जबकि बड़ी गाड़ियों के टेंडर के लिए फाइल उच्च अधिकारियों को भेजी गई है -चंद्रमोहन सिंह, डायरेक्टर, नगर सेना फायर वाहनों का उपयोग गृह विभाग को करना है, इसलिए उनको राशि ट्रांसफर कर दी गई है। उन्हें कौन से मॉडल के वाहन खरीदने हैं, वे तय करेंगे। अब टेंडर कर खरीदी करना उनका काम है। -टंकराम वर्मा, राजस्व एवं आपदा मंत्री समय पर गाड़ियां नहीं पहुंचने से जा रही हैं जान, नुकसान भी ज्यादा दुर्ग में सिलेंडर ब्लास्ट, समय पर गाड़ी नहीं पहुंची: कुम्हारी में 12 मई 2026 को एक घरेलू सिलेंडर ब्लास्ट हुआ। हादसे में एक ही परिवार के 4 लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई। शुरुआती जांच के मुताबिक, धमाका इतना जोरदार था कि 1 किलोमीटर दूर तक आवाज सुनाई दी। जब तक दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, तब तक सब कुछ खाक हो चुका था और चारों लोग दम तोड़ चुके थे। रायपुर के मेटल पार्क में साढ़े आठ घंटे तक धधकती रही फैक्ट्री: रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र के मेटल पार्क में 29 मई 2026 की रात 9:00 बजे ‘आरती फूड्स फैक्ट्री’ में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। औद्योगिक इलाका होने के बावजूद फायर ब्रिगेड की गाड़ी समय पर नहीं पहुंच सकी। नतीजा यह हुआ कि आग फैलती गई और साढ़े आठ घंटे की मशक्कत के बाद अगली सुबह 5:30 बजे इस पर बमुश्किल काबू पाया जा सका।
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