प्रदेशभर से प्रदर्शन करने रायपुर पहुंचे अतिथि व्याख्याता:एकेडमिक सीजन शुरू हुए 48 दिन बीते लेकिन नहीं मिली नियुक्ति, कॉलेजों में पढ़ाई ठप

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शासकीय कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति में देरी और सेवा से जुड़ी मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ शासकीय महाविद्यालयीन अतिथि व्याख्याता पीएचडी-नेट कल्याण संघ ने बुधवार को मंत्रालय का घेराव किया। प्रदेशभर से पहुंचे अतिथि व्याख्याताओं ने कई घंटे तक प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि वे शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिलकर ज्ञापन सौंपें, लेकिन काफी देर तक कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंप दिया। अतिथि व्याख्याताओं ने बताया कि शासकीय कॉलेजों में नया शैक्षणिक सत्र 1 जुलाई से शुरू हो चुका है। छात्र कॉलेज पहुंच रहे हैं, लेकिन करीब डेढ़ महीने बाद भी पिछले सत्र में काम कर चुके कई अतिथि व्याख्याताओं को दोबारा नियुक्ति नहीं मिली है। इससे कई कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नियुक्ति में देरी से अतिथि व्याख्याताओं की आय भी रुक गई है। 17 जुलाई को नई नीति जारी, फिर भी नियुक्ति के आदेश का इंतजार राज्य सरकार ने 17 जुलाई 2026 को अतिथि व्याख्याता नीति-2024 (संशोधित-2026) जारी की थी। संघ का कहना है कि नीति जारी होने के बाद भी उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पिछले सत्र में काम कर चुके अतिथि व्याख्याताओं को दोबारा काम पर बुलाने के निर्देश कॉलेजों को नहीं मिले हैं। उच्च शिक्षा संचालनालय ने बताया कि अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति के आदेश जारी करने के लिए अभी वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार है। हर साल 11 महीने की नियुक्ति, लेकिन देरी से कम हो जाता है मानदेय अतिथि व्याख्याताओं का कहना है कि नीति में 11 महीने तक काम करने का प्रावधान है, लेकिन हर साल नियुक्ति प्रक्रिया में देरी होती है। पिछले सत्र का कार्यकाल 30 मई को खत्म हो गया था। नया सत्र शुरू होने के बाद भी नियुक्ति नहीं होने से उन्हें काम और मानदेय दोनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। संघ का कहना है कि समय पर नियुक्ति नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। इसलिए सभी शासकीय कॉलेजों में एक समान तारीख से नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग की गई है। नई नीति में 400 रुपए का अतिरिक्त भत्ता खत्म करने पर भी आपत्ति अतिथि व्याख्याताओं ने नई नीति में किए गए कुछ बदलावों पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पहले 4 घंटे कक्षा लेने के लिए 2 हजार रुपए मिलते थे और 3 घंटे अतिरिक्त रुकने पर 400 रुपए प्रतिदिन अतिरिक्त कार्य भत्ता मिलता था। नई व्यवस्था में यह अतिरिक्त 400 रुपए का भत्ता खत्म कर दिया गया है। संघ के मुताबिक, अब 7 घंटे तक कॉलेज में मौजूद रहना जरूरी किया गया है, लेकिन इसके बदले अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान नहीं है। ये 6 प्रमुख मांगें रखीं अतिथि व्याख्याताओं ने मंत्रालय में दिए ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें 11 महीने की पूर्णकालिक नियुक्ति तत्काल करने, 50 हजार रुपए प्रतिमाह एकमुश्त मानदेय देने, महिला अतिथि व्याख्याताओं को सवैतनिक मातृत्व अवकाश देने। 65 साल की उम्र तक नौकरी की सुरक्षा देने, PSC सहायक प्राध्यापक भर्ती में अनुभवी अतिथि व्याख्याताओं को 15 से 20 बोनस अंक देने और भर्ती में आयु सीमा में छूट देने की मांग शामिल है। संघ ने यह भी मांग की है कि सहायक प्राध्यापक भर्ती में लंबे समय से शासकीय कॉलेजों में पढ़ा रहे अतिथि व्याख्याताओं के अनुभव को महत्व दिया जाए। संघ का कहना है कि कई अतिथि व्याख्याता 15 से 20 साल से कॉलेजों में पढ़ा रहे हैं और नियमित भर्ती समय पर नहीं होने के कारण लगातार अतिथि व्याख्याता के रूप में काम कर रहे हैं। अधिकारियों से मुलाकात नहीं हुई तो नायब तहसीलदार को ज्ञापन प्रदर्शन के दौरान अतिथि व्याख्याता शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की मांग पर अड़े रहे। कई घंटे तक प्रदर्शन के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई मिलने नहीं आया। इस दौरान पुलिस के साथ भी गहमागहमी की स्थिति बनी। आखिर में प्रदर्शनकारियों ने नायब तहसीलदार को अपना ज्ञापन सौंपा। संघ ने शासन से मांग की है कि नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूरी कर कॉलेजों को निर्देश जारी किए जाएं, ताकि अतिथि व्याख्याताओं को समय पर काम मिल सके और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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