भास्कर न्यूज | जांजगीर बिर्रा थाना क्षेत्र में होली के दिन पुरानी रंजिश के चलते हुई हत्या के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र चौहान ने मामले में दोषी पाए गए तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने कहा कि आरोपियों का कृत्य गंभीर प्रकृति का है, ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरती जा सकती। अभियोजन और लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर के अनुसार घटना 14 मार्च 2025 की है। प्रार्थी अंकुर वैष्णव और मृतक चित्रांशु पटेल होली के दिन ग्राम डभराखुर्द की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पुरानी रंजिश के चलते राज केंवट और उसके साथियों ने रास्ते में उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने योजना बनाकर चित्रांशु पर हमला किया। राज केंवट, भुनेश्वर पटेल और मोहन पटेल ने बांस के डंडों से चित्रांशु की बेरहमी से पिटाई की। इस दौरान दयाराम और दरसराम ने जान से मारने की धमकी दी और गाली‑गलौज की। हमले में चित्रांशु के सिर में गंभीर चोटें आईं। उसे इलाज के लिए मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल जांजगीर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में बिर्रा थाना पुलिस ने 16 मार्च 2025 को अंकुर वैष्णव की रिपोर्ट पर अपराध दर्ज किया था। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, 115(2), 351(2), 191(2), 103(1,2) और 109 के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना की। जांच उपरांत उपनिरीक्षक केपी सिंह ने चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर तर्क रखा कि आरोपियों ने रंजिश के कारण युवक की हत्या की है। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर तीन मुख्य आरोपियों राज केंवट (19 वर्ष), दादूराम पटेल उर्फ मुनेश्वर (23 वर्ष) और दयाराम पटेल (37 वर्ष) को दोषी ठहराया। न्यायालय ने तीनों दोषियों को बीएनएस की धारा 103(1) के तहत आजीवन कारावास और एक‑एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर एक‑एक माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
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