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- Water Levels Dropped Below 1000 Feet In Areas Like Saddu, Mowa, Kachana, VIP Road, Sejbahar In The Capital, Leading To Severe Water Crisis In Many Areas.
रायपुर5 मिनट पहलेलेखक: मनीष पाण्डेय
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राजधानी रायपुर के पॉश और तेजी से विकसित हो रहे इलाके गंभीर जलसंकट की चपेट में हैं। सड्डू, मोवा, कचना, डूंडा, सेजबहार, वीआईपी रोड और दलदल सिवनी जैसे क्षेत्रों में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। पिछले 15 वर्षों में इन इलाकों में पानी का स्तर करीब 60% नीचे चला गया है।
वर्ष 2010 में जहां 400-500 फीट पर पानी मिल जाता था, वहीं अब 800 से 1000 फीट तक बोरिंग करनी पड़ रही है। सिलतरा में स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां भू-जल 1500 फीट तक पहुंच चुका है। हालात ये हैं कि आउटर के इन इलाकों में सालभर पानी का संकट रहता है।
भास्कर की पड़ताल में पता चला कि इन इलाकों में गर्मी के मौसम में टैंकर पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इन क्षेत्रों में मार्च के शुरुआती दिनों से ही टैंकर मंगवाए जाते हैं। इसके लिए प्रति परिवार बड़ी रकम चुकानी पड़ती है। केवल बारिश के मौसम को छोड़ अन्य सीजन में वहां पानी की कमी रहती है।
शहर के कई अंदरूनी इलाके भी प्रभावित
आउटर ही नहीं, शहर के कई भीतरी इलाकों में भी ग्राउंड वाटर लेवल तेजी से घटा है। सिविल लाइन, तेलीबांधा, वीआईपी रोड जैसे इलाकों में भी ग्राउंड वाटर लेवल तेजी से गिरा है। यही नहीं सिविल लाइन, राजेंद्र नगर, कटोरा तालाब वाला इलाका अब डीप बोरवेल वाले क्षेत्र बन चुके हैं।

रायपुर में ‘वॉटर इमरजेंसी’: सहू, भनपुरी, सिलतरा, उरला बढ़ा रहे चिंता
इन इलाकों के लिए क्या है निगम का एक्शन प्लान... डूंडा में बनेगा फिल्टर प्लांट नगर निगम करीब 186 करोड़ की लागत से डूंडा नया फिल्टर प्लांट का निर्माण करने जा रही है। इसके लिए शुरुआती तैयारियां शुरू हो चुकी है। यहां फिल्टर प्लांट बन जाने से डूंडा, बोरिया खुर्द, देवपुरी, जोरा, लाभांडी, सेजबहार, अमलीडीह, मोवा, सड्डू, कचना, वीआईपी रोड, अनुपम नगर जैसे इलाकों में पेयजल व्यवस्था बेहतर हो पाएगी।
भास्कर एक्सपर्ट- डॉ. विपिन दुबे, हाइड्रोलॉजिस्ट
तेजी से विकास के चलते रायपुर अब उन शहरों में शुमार है, जहां ओवर पॉपुलेशन है। आउटर में लगातार नई कॉलोनियां बस यही हैं और उनमें पानी का एकमात्र स्रोत भू-जल ही है। ऐसे में आउटर के इलाकों में लगातार बोर हो रहे हैं और भू-जल निकाला जा रहा है। यही हाल शहर के बाकी हिस्से का है।
तालाब पाटे जा रहे हैं, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने में किसी की रुचि नहीं है। सीधे तौर पर बहा जाए तो रेट ऑफ डिस्चार्ज ज्यादा है, लेकिन इसकी तुलना में रेट ऑफ रिचार्ज कम है। अब जरूरी है कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाना ही होगा, ताकि ग्राउंड वाटर लेवल रिचार्ज हो सके।
सीधी बात – मीनल चौथे, महापौर, नगर निगम, रायपुर
सभी जगह वाटर हार्वेस्टिंग लगाएंगे
शहर के आउटर के इलाकों में भू-जल तेजी से नीचे जा रहा है, क्या प्लान है?
वाटर हार्वेस्टिंग ही इसका एकमात्र उपाय है। नहीं तो हम पानी के लिए जूझते रहेंगे।
ये तो अनिवार्य है, इसके बिना निर्माण की अनुमति भी नहीं मिलती?
इस नियम का पालन करने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश है। जो नहीं बनाते उनकी राशि राजसात कर रहे हैं।
अभी इसके लिए क्या प्लान है, क्योंकि जल्द ही मानसून आ जाएगा?
सभी जोन में सरकारी जमीन का सर्वे करने और वहां वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करने का स्पष्ट निर्देश है। इसके लिए टारगेट भी तय किया जाएगा।

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