नोटों की बरामदगी के बाद जब पुलिस ने मकान के अन्य कमरों और बाथरूम की तलाशी ली तो वहां रखी एक पानी टंकी को देखकर संदेह हुआ। टंकी खोलने पर पुलिस और गवाहो …और पढ़ें

HighLights
- गीतांजलि नगर में रहने वाला पवन सिंह ठाकुर अपने किराये के मकान में जाली नोट छाप रहा है।
- पुलिस टीम ने जब गवाहों के साथ मकान पर दबिश दी, तो मौके से आरोपित पवन ठाकुर मिला।
- तलाशी में 200 और 500 रुपये के नकली नोट, कलर प्रिंटर, इंक और कटर मशीन बरामद हुई।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। विशेष न्यायालय (एनआइए) ने एक दिल दहला देने वाले जघन्य हत्याकांड और जाली नोट मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश सिराज़ुद्दीन कुरैशी ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर शव के टुकड़े पानी टंकी में छिपाने वाले आरोपी पवन सिंह ठाकुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपित को जाली नोट रखने के अपराध में भी पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई है।
अभियोजन के अनुसार पांच मार्च 2023 को एंटी क्राइम एंड साइबर सेल बिलासपुर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि उसलापुर के गीतांजलि नगर में रहने वाला पवन सिंह ठाकुर अपने किराये के मकान में जाली नोट छाप रहा है। पुलिस टीम ने जब गवाहों के साथ मकान पर दबिश दी, तो मौके से आरोपित पवन ठाकुर मिला। पुलिस ने जब कमरे की तलाशी ली तो वहां से भारी मात्रा में 200 और 500 रुपये के नकली नोट, कलर प्रिंटर, इंक और कटर मशीन बरामद हुई।
बाथरूम के पास रखी टंकी को खोला तो उड़ गए होश
- नोटों की बरामदगी के बाद जब पुलिस ने मकान के अन्य कमरों और बाथरूम की तलाशी ली तो वहां रखी एक पानी टंकी को देखकर संदेह हुआ।
- टंकी खोलने पर पुलिस और गवाहों के होश उड़ गए उसके भीतर एक महिला का क्षत-विक्षत शव पड़ा था।
- पूछताछ में आरोपित ने स्वीकार किया कि वह शव उसकी पत्नी सती साहू का है।
- चरित्र शंका के चलते 6 जनवरी 2023 की सुबह उसने पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी थी।
- साक्ष्य छिपाने के लिए बाजार से इलेक्ट्रानिक कटर मशीन खरीदकर शव के हाथ-पैर काट दिए थे।
- उसने सिर और धड़ को पानी टंकी में छिपाया था, जबकि हाथ-पैरों को पालिथिन में लपेटकर घर में ही दबा रखा था।
इस तकनीकी चूक से नोट छापने की धाराओं में मिली दोषमुक्ति
न्यायालय ने अपने फैसले में पाया कि विवेचक ने मौके से जब्त रंगीन प्रिंटर, कार्ट्रिज, इंक और बटर पेपर को रासायनिक परीक्षण या किसी साइबर विशेषज्ञ संस्थान के पास जांच के लिए नहीं भेजा था। इस लापरवाही के कारण यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हो सका कि जब्त नोट इसी प्रिंटर से छापे गए थे। नतीजतन, न्यायालय ने आरोपित को धारा 489-ए, 489-बी और 489-डी के आरोपों से मुक्त कर दिया।
आरोपित को इन धाराओं के तहत सजा दी गई
धारा 302 (हत्या): आजीवन कारावास एवं 100 रुपये का अर्थदंड
धारा 201 (साक्ष्य विलोपन): पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100 अर्थदंड
धारा 489-सी (जाली नोट रखना) : पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100 अर्थदंड
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