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भास्कर न्यूज | राजिम एक मई को विश्व मजदूर दिवस एवं छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार के अवसर पर राजिम नगर में सामाजिक समरसता और श्रम सम्मान का एक अनूठा आयोजन देखने को मिला। नगर के किसान पुत्रों ने सामाजिक नेता लाला साहू के निवास पर पारंपरिक बोरे-बासी भोज का आयोजन किया, जिसमें सर्व समाज के लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया। इस आयोजन की खासियत यह रही कि समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बिना किसी भेदभाव के एक साथ पंगत में बैठकर बोरे-बासी का आनंद लिया। आमतौर पर घरों में खाया जाने वाला यह पारंपरिक भोजन इस दिन सामाजिक एकता, भाईचारे और श्रमिक सम्मान के प्रतीक के रूप में सामूहिक रूप से मनाया गया। कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता जितेंद्र राजू सोनकर, नगर साहू संघ राजिम के अध्यक्ष रामकुमार साहू, सचिव राजू साहू, कोषाध्यक्ष तरुण साहू, संगठन मंत्री विष्णु साहू, पार्षद आकाश सिंह राजपूत, बलराम यादव, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शिवराज देवांगन, युवा नेता भूपेंद्र यादव, कुणाल गोस्वामी, इंद्रजीत कंडरा, समाजसेवी भोला साहू, किसलाल साहू सहित नवापारा क्षेत्र के डिगेश्वर साहू, कोमल साहू और आलोक कुमार साहू सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक एकता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। यह आयोजन यह संदेश देने में सफल रहा कि जब परंपरा, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता एक साथ जुड़ते हैं, तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। राजिम का यह सामूहिक बोरे-बासी आयोजन निश्चित ही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बनेगा। बोरे-बासी: परंपरा और सेहत का संगम: बता दें, बोरे-बासी केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि गर्मी के मौसम में बेहद लाभकारी आहार भी है। यह शरीर को शीतलता प्रदान करता है, पाचन को बेहतर बनाता है और हल्का व सुपाच्य होने के कारण स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। यही कारण है कि आज भी प्रदेश में इसे बड़े चाव से खाया जाता है। छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की महक से महका माहौल बोरे-बासी के साथ आम और टमाटर की चटनी, अचार, चेंच भाजी और छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध व्यंजन सालगा बड़ा की सब्जी परोसी गई। सादगी, अपनत्व और पारंपरिक स्वाद से सराबोर इस आयोजन ने सभी का मन मोह लिया। लोगों ने मिल-जुलकर भोजन किया व छत्तीसगढ़ी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
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