नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: सिम्स के बाद संभाग के दूसरे सबसे बड़े जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ दिनों से अस्पताल के एक्सरे विभाग में एक्सरे फिल्म (डिटेल शीट) खत्म हो चुकी है। इसके चलते दूर-दराज के गांवों और शहर के गरीब तबके से आने वाले सैकड़ों मरीज हर दिन बिना एक्सरे रिपोर्ट भटकने को मजबूर हैं।
हड्डी रोग विभाग (आर्थोपेडिक डिपार्टमेंट) की ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों को डाक्टर एक्सरे कराने की सलाह तो दे रहे हैं, लेकिन जब मरीज एक्सरे रूम पहुंच रहे हैं, तो उन्हें फिल्म न होने की बात कहकर टका सा जवाब दिया जा रहा है। इसी तरह छाती संबंधी समस्याओं के साथ अन्य तरह के इलाज में भी चिकित्सक एक्सरे लिख रहे है, लेकिन
जैसे ही चिकित्सक एक्सरे रूम में पहुंच रहा है, वैसे ही उन्हें बताया जा रहा है कि एक्सरे फिल्म खत्म हो गया है।वैसे ही मरीज निराश हो जा रहे है और उन्हें निजी सेंटरों में एक्सरे कराने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।
समय पर नहीं की गई डिमांड
जानकारी के मुताबिक जब एक्सरे फिल्म सीमित थी तो उस समय डिपार्टमेंट के कर्मचारियों ने लापरवाही पूर्वक काम किया। समय रहते एक्सरे फिल्म की डिमांड नहीं की गई।वही एक्सरे फिल्म खत्म होने के बाद अब परेशानी हो रही है। स्थिति को देखते हुए डिमांड किया गया है, लेकिन फिल्म कब आएगा, यह स्थिति स्पष्ट नहीं है।
प्राइवेट सेंटर्स की चांदी, 400 से 600 रुपये फूंकने को मजबूर गरीब
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 60-70 से अधिक मरीजों का एक्सरे किया जाता है। इनमें से अधिकांश सड़क दुर्घटना के शिकार, मारपीट में घायल या गंभीर रूप से बीमार मरीज होते हैं। अस्पताल में फिल्म न होने का सीधा फायदा आसपास संचालित निजी डायग्नोस्टिक सेंटर्स और प्राइवेट विंग्स को मिल रहा है। मजबूरी में मरीजों को बाहर जाकर एक एक्सरे के लिए 400 से 600 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे जिला अस्पताल की निश्शुल्क चिकित्सा की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या कहते है पीड़ित
केस 1: तखतपुर से आए रामखिलावन साहू ने बताया कि उनके बेटे के हाथ में गंभीर चोट लगी है। जिला अस्पताल में एक्सरे तो हुआ, लेकिन फिल्म नहीं मिली। मोबाइल पर फोटो खींचने को कहा गया। जब डॉक्टर को मोबाइल दिखाया, तो उन्होंने कहा कि इसमें साफ समझ नहीं आ रहा है, बाहर से एक्सरे कराकर लाओ।
केस 2: सीपत क्षेत्र की रहने वाली कौशल्या बाई पैर में मोच आने के कारण चल नहीं पा रही हैं। उनके पास स्मार्टफोन नहीं है। उन्होंने बताया कि फिल्म न मिलने के कारण वे सुबह से अस्पताल के गलियारे में बैठी हैं और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अब इलाज कैसे होगा।
सप्लाई चेन टूटने और बजट की कमी से गहराया संकट
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वेयरहाउस और लोकल सप्लायर को समय पर भुगतान न होने और डिमांड नोट भेजने में हुई देरी की वजह से एक्सरे फिल्मों की सप्लाई रुक गई है। अस्पताल प्रबंधन हर बार की तरह इस बार भी बजट और तकनीकी दिक्कतों का रोना रो रहा है। हैरानी की बात यह है कि तीन दिन बीत जाने के बाद भी वैकल्पिक तौर पर स्थानीय स्तर (लोकल परचेज) से फिल्मों की व्यवस्था नहीं की जा सकी हैयह भी पढ़ें- CG Weather: छत्तीसगढ़ में सूरज उगल रहा आग, 45 डिग्री के साथ बिलासपुर सबसे गर्म, अगले 5 दिन लू का अलर्ट जारी।
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