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भास्कर न्यूज | कवर्धा जिले के बोड़ला ब्लॉक अंतर्गत ग्राम जामुनपानी में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जल ग्रहण मिशन (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेए सवाय 2.0) के तहत बनाए जा रहे कुओं में शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिस कुएं की खुदाई ग्रामीणों के हाथों से होनी थी, वहां रात-दिन जेसीबी मशीनों का उपयोग िकया जा रहा है। इससे न केवल तकनीकी गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, बल्कि भीषण गर्मी के इस दौर में स्थानीय मजदूरों के मुंह से निवाला भी छीना जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, जामुनपानी में करीब 1.50 लाख रुपए की लागत से कुआं खनन का कार्य स्वीकृत किया गया है। नियमतः जल ग्रहण मिशन और मनरेगा के कन्वर्जेंस वाले इन कार्यों में मशीन का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, कार्य स्थल पर खुलेआम जेसीबी से खुदाई कराई जा रही है। यह केवल जामुनपानी ही नहीं आसपास के गांवों में भी जेसीबी से ही कुएं की खुदाई की गई। आरोप है कि काम को जल्द निपटाने,मुनाफे के फेर में जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार नियमों को दरकिनार कर रहे हैं। गुणवत्ता पर संकट बढ़ा आगे धंस सकती है दीवारें विशेषज्ञों के अनुसार, कुआं खनन में मैन्युअल खुदाई (मजदूरों द्वारा) को ही प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि इससे कुएं की दीवारें स्थिर रहती हैं। मशीन से खुदाई करने पर मिट्टी के भीतर कंपन होता है, जिससे कुएं की संरचना कमजोर हो जाती है। बारिश के दौरान ऐसे कुओं के धंसने का खतरा बना रहता है, जो आगे घातक होगा।
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